(तस्वीरों के साथ)
ठाणे/मुंबई, 21 फरवरी (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यकर्ता की ओर से उनके खिलाफ दायर मानहानि के मामले में नया जमानतदार पेश करने के लिए शनिवार को महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत में पेश हुए। उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को अपना नया जमानतदार नामित किया।
राहुल के महाराष्ट्र के ठाणे जिले की ओर जाते समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने मुलुंड टोल प्लाजा पर उन्हें काले झंडे दिखाए, नारे लगाए और कांग्रेस पर दिल्ली में ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में युवा कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के माध्यम से भारत की छवि खराब करने का आरोप लगाया।
संयुक्त दीवानी न्यायाधीश और प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) पीएम कोलसे की अदालत ने राहुल के नये जमानतदार से संबंधित प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद मानहानि मामले की अगली सुनवाई चार अप्रैल के लिए तय की।
आरएसएस कार्यकर्ता राजेश कुंते की ओर से दायर मामले में कांग्रेस नेता को पहले ही व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी जा चुकी है। कुंते ने अदालत में शिकायत दायर कर आरोप लगाया है कि राहुल ने 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान सोनाले गांव में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे संघ का हाथ था।
अदालत ने राहुल से इस मामले में एक नया जमानतदार पेश करने के लिए कहा था, क्योंकि पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का 12 दिसंबर 2025 को निधन हो गया था, जो उनके जमानतदार थे।
जब राहुल 2016 में अदालत के समक्ष पेश हुए थे, तब पाटिल उनके जमानतदार बने थे, जिसके बाद अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।
शनिवार को नया जमानतदार बनाने की कार्यवाही को त्वरित प्रक्रिया के तहत लगभग 15 मिनट में पूरा कर लिया गया।
राहुल के वकील नारायण अय्यर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘अदालत ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के जमानत पत्र औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिए हैं। मामले की अगली सुनवाई चार अप्रैल के लिए निर्धारित की गई है।’’
अय्यर ने कहा, ‘‘हमें भारतीय न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हमें विश्वास है कि न्याय मिलेगा। राहुल को भविष्य की सुनवाइयों में व्यक्तिगत पेशी से स्थायी छूट दे दी गई है, लेकिन हम उचित समय पर बचाव पक्ष के गवाहों को पेश करेंगे।’’
अय्यर ने कहा कि जमानत की औपचारिकताएं पूरी हो जाने के बाद अब जांच अधिकारी (आईओ) से जिरह फिर से शुरू होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल से कोई जिरह नहीं की गई।
अय्यर ने कहा कि यह कार्यवाही उच्चतम न्यायालय के उन निर्देशों के अनुरूप की गई थी, जिनमें मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों को त्वरित अदालतों के माध्यम से शीघ्रता से निपटाने के लिए कहा गया है।
पूरी प्रक्रिया लगभग 15 मिनट में संपन्न हो गई, जिसके बाद राहुल वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ मुंबई वापस चले गए। उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।
बाद में, राहुल ने मुंबई में अपने सहयोगियों से मुलाकात की और 15 जनवरी को हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के कारणों के बारे में पूछा।
पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि दिल्ली रवाना होने से पहले राहुल ने महाराष्ट्र में मौजूदा राजनीतिक स्थिति और कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का जायजा लिया।
राहुल की मुंबई के एक होटल में दोपहर के भोजन पर आयोजित बैठक में सपकाल और मुंबई कांग्रेस प्रमुख वर्षा गायकवाड़ मौजूद थीं।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर सवाल उठाए।
पार्टी ने 227 सदस्यीय बीएमसी में केवल 24 सीट जीतीं, जिससे महा विकास आघाडी (एमवीए) के सहयोगी दलों-शिवसेना (उबाठा) और राकांपा (शप) के साथ गठबंधन किए बिना अकेले चुनाव लड़ने के पीछे के तर्क पर बहस छिड़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता ने मुंबई इकाई को जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए कमर कसने को कहा।
सूत्रों ने बताया, ‘‘राहुल ने मुंबई और महाराष्ट्र में पार्टी की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने पार्टी संगठन को लेकर सपकाल से व्यक्तिगत मुलाकात की।’’
वहीं, एआई शिखर सम्मेलन में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन का जिक्र करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राहुल लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहलों का विरोध करते आए हैं।
एक भाजपा समर्थक ने कहा, ‘‘राहुल गांधी प्रधानमंत्री के हर कदम का विरोध करते हैं, यहां तक कि राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर भी। एआई शिखर सम्मेलन में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारे लगाकर देश की छवि खराब की। इसीलिए हमने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया।’’
राहुल के दौरे के दौरान पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी, ताकि सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच किसी भी तरह का टकराव न हो सके।
कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने विरोध-प्रदर्शन करने के लिए भाजपा की आलोचना की।
भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने कहा कि यह ‘‘प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास’’ है।
सावंत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भाजपा के ‘‘समर्पण’’ पर सवाल उठाए और अमेरिकी निवेशक जेफ्री एप्स्टीन से संबंधित मामलों पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को जनता को जवाब देना होगा।
राकांपा (शप) ने भी ‘काला झंडा’ दिखाकर किए गए प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक मानदंडों का ‘‘अपमानजनक’’ उल्लंघन बताया।
भाषा गोला पारुल
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