नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 14 साल पुराने हत्या के मामले में शामिल पांच आरोपियों को बरी कर दिया है और दिल्ली पुलिस आयुक्त को जांच में ‘‘गंभीर खामियों’’ के कारण आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज अरोड़ा उक्त पांच लोगों के मामले की सुनवाई कर रहे थे। उनके खिलाफ सोनिया विहार पुलिस थाने में हत्या, अपहरण और सबूत नष्ट करने के दंडात्मक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने 12 जुलाई 2010 को कमल सिंह नामक व्यक्ति का अपहरण कर लिया था और लोहे की छड़ तथा घूंसे मारकर उनकी हत्या कर दी थी।
अदालत ने 28 फरवरी को दिए फैसले में कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सिंह के शरीर पर चोट के 76 निशान थे। अभियोजन पक्ष ने अपना पक्ष साबित करने के लिए परिस्थितिजन्य सबूत के साथ तीन प्रत्यक्षदर्शियों को प्रत्यक्ष गवाह के तौर पर पेश किया।
अदालत ने जिरह के दौरान कहा कि पहले चश्मदीद ने माना कि उसने घटना नहीं देखी, जबकि बाकी दो गवाहों ने पांचों आरोपियों की पहचान नहीं की।
अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य के संबंध में कहा कि पुलिस द्वारा बरामद की गई वस्तुओं के बारे में गंभीर संदेह है। पुलिस ने एक कार, एक लोहे की छड़ और मृतक का बटुआ और चप्पलें बरामद की थीं।
अदालत ने कहा, ‘‘खुले स्थान से सभी चीजें बरामद की गईं फिर भी किसी भी स्वतंत्र गवाह को शामिल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। जिन स्थानों से बरामदगी की गई, उन स्थानों की कोई तस्वीर भी रिकार्ड में नहीं रखी गई तथा बरामदगी के समय पुलिस अधिकारियों के थाने से जाने और आने के संबंध में कोई रोजनामचा भी रिकॉर्ड में नहीं रखा गया।’’
अदालत ने बरामदगी के समय और क्रम को भी संदिग्ध बताया।
अदालत ने जांच में ‘‘गंभीर चूक’’ का जिक्र करते हुए कहा कि पीड़ित की चप्पलों, लोहे की छड़ और कार को फोरेंसिक विश्लेषण के लिए नहीं भेजा गया, जिससे यह पता लगाया जा सके कि उन पर खून के धब्बे थे या नहीं।
अदालत ने कहा, ‘‘जांच एजेंसी ने मृतक के शव के पास से बरामद चाकू से उंगलियों के निशान लेने का कोई प्रयास नहीं किया।’’
इसने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, इसलिये आरोपी बच्चन नागर, उमेश कुमार, योगेश, परविंदर और प्रवीण नागर को सभी आरोपों से बरी किया जाता है।
भाषा प्रीति माधव
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