नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने दहेज से जुड़ी मौत के एक मामले में एक व्यक्ति और उसके परिवार के चार सदस्यों को बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा कि मृत महिला द्वारा कथित आत्महत्या से पहले लिखे गये पत्र (सुसाइड नोट) ने दहेज उत्पीड़न और कार या पांच लाख रुपये की मांग के अभियोजन पक्ष (पुलिस) के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी, राहुल और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। इनपर राहुल की पत्नी को परेशान करने का आरोप था, जिसके कारण उसने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
अदालत ने 29 मई के एक आदेश में कहा, ‘‘शिकायतकर्ता द्वारा दहेज की मांग के मौखिक आरोप मृतका द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट के विरोधाभासी हैं, जो स्पष्ट रूप से साबित करता है कि गृह-क्लेष दहेज को लेकर नहीं, बल्कि घरेलू काम को लेकर थी।’’
राहुल की पत्नी ऋतु की मौत के मामले में आंबेडकर नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ऋतु ने 20 फरवरी 2016 को शादी के तीन महीने पूरे होने से पहले ही मदनगीर स्थित अपने ससुराल में आत्महत्या कर ली थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ऋतु के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि 27 नवंबर 2015 को उसकी शादी के तुरंत बाद ही आरोपियों ने कार या पांच लाख रुपये नकद की मांग शुरू कर दी थी और कम दहेज लाने के कारण उसे प्रताड़ित किया जाता था तथा उसके साथ मारपीट भी की जाती थी।
अदालत ने गौर किया कि ऋतु की अप्राकृतिक मौत हो गई और चिकित्सकीय साक्ष्यों से यह साबित हो गया है कि उसकी मौत एल्युमिनियम फॉस्फाइड का सेवन करने के बाद फांसी लगाने से हुई।
न्यायाधीश ने कहा, ‘मृतका ने स्वयं स्पष्ट रूप से निवेदन किया था कि परिवार पर कोई कानूनी मामला न चलाया जाए। आपराधिक दोष सिद्ध करने के लिए संदेह से परे सबूत की आवश्यकता होती है।’
अदालत ने कहा कि ‘सुसाइड नोट’ में भले ही ससुराल वालों द्वारा घर के कामों को लेकर ‘मानसिक प्रताड़ना’ का जिक्र था, लेकिन उसमें कार, नकद या दहेज की किसी भी मांग का ‘कोई भी संकेत’ नहीं था।
अदालत ने कहा कि सुसाइड नोट को ‘बारीकी से पढ़ने’ से पता चला कि मृतका और उसके ससुराल वालों के बीच तनाव की जड़ें घरेलू कामकाज से संबंधित शिकायतें थीं।
अदालत ने यह माना कि अभियोजन पक्ष दहेज की मांग से जुड़ी प्रताड़ना साबित करने में असफल रहा।
अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।
भाषा शुभम सुरेश
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