सरकारी पैनल का आम वाले पेय में 22-25 प्रतिशत गूदा अनिवार्य करने का सुझाव

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सरकारी पैनल का आम वाले पेय में 22-25 प्रतिशत गूदा अनिवार्य करने का सुझाव

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  • Publish Date - July 22, 2026 / 07:43 PM IST,
    Updated On - July 22, 2026 / 07:43 PM IST

नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार की एक विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया है कि आम वाले पेय पदार्थ में 22-25 प्रतिशत असली प्राकृतिक आम का गूदा (पल्प) होना अनिवार्य किया जाए। साथ ही, पांच प्रतिशत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का रियायती स्लैब सिर्फ उन्हीं उत्पादों के लिए हो जो इस मानक को पूरा करते हों। इस कदम का मकसद तोतापुरी आम के पल्प की मांग को बढ़ाना और किसानों को मिलने वाली कीमतों में सुधार करना है।

लखनऊ में आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (सीआईएसएच) के निदेशक, टी. दामोदरन की अध्यक्षता वाली समिति ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में अपनी रिपोर्ट सौंपी।

मंत्री ने अधिकारियों को इन सुझावों पर अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया है।

समिति को इस मौसम में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक (जो इस फसल के मुख्य उत्पादक राज्य हैं) में तोतापुरी आम की कीमतों में आई भारी गिरावट का अध्ययन करने का काम सौंपा गया था।

दामोदरन ने इस गिरावट के लिए प्रसंस्करण क्षमता और खरीद के समय में तालमेल की कमी, घरेलू स्तर पर बिकने वाले पेय में पल्प की कम मात्रा और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव को जिम्मेदार ठहराया।

समिति का मुख्य सुझाव पेय उद्योग के कर को असल फल की मात्रा से जोड़ना है।

जिन उत्पादों में ‘पल्प’ की मात्रा तय सीमा से कम होगी, उन पर ज्यादा जीएसटी लगेगा, जबकि नियमों का पालन करने वाले उत्पादों पर पांच प्रतिशत का रियायती स्लैब लागू रहेगा।

मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इस तरीके से तोतापुरी पल्प की खपत बढ़ने और ग्राहकों को मिलने वाले पेय की पोषक तत्वों की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।

इसे लागू करने के लिए एफएसएसएआई, जीएसटी परिषद और वित्त, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कृषि और स्वास्थ्य मंत्रालयों के साथ एक अंतर-मंत्रालयी बैठक बुलाई जाएगी, ताकि मानकों और कर ढांचे को अंतिम रूप दिया जा सके।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय