नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक ऐसे व्यक्ति की पत्नी को उसका कानूनी संरक्षक नियुक्त किया है, जो पिछले साल फरवरी से बीमारी के कारण कोमा जैसी स्थिति में है।
अदालत ने अपने “पैरेंस पैट्रिए”अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया, ताकि पत्नी को अपने जीवित पति के समान अधिकार, कर्तव्य और दायित्व प्राप्त हो सकें और उन्हें सुरक्षित व संरक्षित रखा जा सके।
उच्चतम न्यायालय के अनुसार, न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संवैधानिक न्यायालयों द्वारा“पैरेंस पैट्रिए” अधिकार के सिद्धांत का लागू किया जा सकता है। इसे उन असाधारण मामलों में लागू किया जाना चाहिए जहां याचिकाकर्ता मानसिक या शारीरिक रूप से सक्षम न हो या बहुत छोटा हो, और जहां कोई अन्य संरक्षक या कानूनी संरक्षक न हो।
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता उस महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसने कहा था कि मस्तिष्क में रक्तस्राव से पीड़ित होने के बाद उनका पति लगातार कोमा जैसी स्थिति में है।
याचिका में पति की संपत्ति से संबंधित सभी मामलों में उनका संरक्षक नियुक्त करने की मांग की गई थी ताकि वह उनकी इलाज संबंधी आवश्यकताओं और खर्चों का प्रबंधन कर सके।
अदालत ने 24 दिसंबर के अपने फैसले में उसके समक्ष मौजूद साक्ष्यों पर गौर करते हुए कहा कि यह ‘स्पष्ट रूप से स्थापित’ हो गया है कि पति कोमा जैसी स्थिति में है, किसी भी स्वतंत्र निर्णय या गतिविधि को करने में असमर्थ है, और इसलिए, उसके कल्याण के लिए, ‘एक कानूनी संरक्षक की नियुक्ति आवश्यक है।’
इसमें उल्लेख किया गया है कि दंपति के दो बच्चों ने हलफनामे प्रस्तुत किए हैं जिसमें कहा गया है कि उन्हें अपनी मां को संरक्षक नियुक्त किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
भाषा नोमान रंजन
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