नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शादी का वादा कर महिला को रिश्ते में फंसाकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म करने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि यह वादा ‘झूठा’ था और इसके पीछे ‘‘अपनी काम-लालसा को पूरा करने की गुप्त मंशा’’ थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल कुमार ने मोहित राजपाल के खिलाफ दर्ज मामले में सुनवाई की जिस पर शादी का झूठा वादा करके एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने का आरोप था। अदालत ने कहा कि इस तरह की सहमति को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता।
अदालत ने 9 अप्रैल के आदेश में कहा, ”यह सिद्ध हो चुका है कि अभियुक्त द्वारा पीड़िता से किया गया विवाह का वादा शुरू से ही झूठा था और यह उसने अपनी काम-लालसा को संतुष्ट करने के गुप्त उद्देश्य से किया था, जिसमें उसे (वादे को) पूरा करने की कोई मंशा प्रारंभ से ही नहीं थी।”
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने महिला से शादी का झूठा वादा कर 2016 से 2018 तक उससे शारीरिक संबंध स्थापित किए। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2) (दुष्कर्म), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 313 (बिना सहमति के गर्भपात कराना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया।
अदालत ने कहा कि यह वादा शुरू से ही कपटपूर्ण था और इसका उपयोग महिला की सहमति प्राप्त करने के साधन के रूप में किया गया।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आरोपी द्वारा विवाह का झूठा वादा ही पीड़िता के लिए आरोपी के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाने का एकमात्र कारण था।’’
पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने जबरन उसका यौन उत्पीड़न किया, उसे गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया और कानूनी कार्रवाई करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 377, 313 और 506 के तहत आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन उसे बार-बार दुष्कर्म करने का दोषी पाया।
इसके बाद अदालत ने सजा पर दलीलें सुनने के लिए मामले को अगली तारीख के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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यासिर पवनेश
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