दिल्ली की अदालत ने म्यांमा ड्रोन प्रशिक्षण शिविर मामले में अमेरिकी नागरिक वैन डाइक को जमानत दी
दिल्ली की अदालत ने म्यांमा ड्रोन प्रशिक्षण शिविर मामले में अमेरिकी नागरिक वैन डाइक को जमानत दी
नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने म्यांमा में जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण शिविर से जुड़े एनआईए के मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक को शुक्रवार को जमानत दे दी।
विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने वैन डाइक को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर राहत दी। अदालत ने वैन डाइक को दिल्ली में रहने का निर्देश दिया और जांच अधिकारी द्वारा तलब किए जाने पर जांच में शामिल होने के लिए कहा।
अदालत में वैन डाइक की ओर से अधिवक्ता रोहित डंडरियाल और रोहित गौर पेश हुए। जमानत पर सुनवाई के बाद डंडरियाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मेरा मुवक्किल जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है और अदालत द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पालन करेगा।’’
अदालत ने बंद कमरे में हुई कार्यवाही के दौरान यह भी कहा कि मामले में गिरफ्तार यूक्रेन के छह नागरिकों को उचित जमानत याचिका दाखिल करने पर जमानत का अनुरोध करने का अधिकार होगा।
वैन डाइक ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा 43डी(2) (विशेष प्रावधान) के साथ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 187(3) (डिफॉल्ट जमानत से संबंधित प्रावधान) के तहत जमानत का अनुरोध किया था।
यह याचिका जांच पूरी करने के लिए निर्धारित समयसीमा समाप्त होने पर ‘डिफॉल्ट’ जमानत के वैधानिक अधिकार के आधार पर दाखिल की गई थी।
यूएपीए के तहत आतंकवाद से जुड़े अपराधों में जांच की अवधि को लोक अभियोजक की संतोषजनक रिपोर्ट के आधार पर विशेष अदालत द्वारा बढ़ाकर 180 दिन तक किया जा सकता है।
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने अदालत से अवधि बढ़ाने की अनुमति लेने के बाद इस मामले में कथित यूएपीए अपराधों के तहत 180 दिन तक जांच की थी। हालांकि, अपने पहले आरोपपत्र में उसने आव्रजन और विदेशी अधिनियम की धाराओं का उल्लेख किया, और कहा कि यूएपीए के तहत जांच जारी है।
एनआईए ने इस मामले में सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, लेकिन आरोपपत्र में यूएपीए की धाराओं का इस्तेमाल नहीं किया है।
एनआईए के आठ सितंबर को दाखिल आरोपपत्र में सातों आरोपियों पर आव्रजन और विदेशी अधिनियम की धारा 21 (वैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज के बिना भारत में प्रवेश करने की सजा का प्रावधान) और धारा 23 के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया है।
एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमा में प्रवेश किया था और कथित तौर पर म्यांमा स्थित जातीय सशस्त्र समूहों के लिए पहले से निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस प्रशिक्षण में म्यांमा की सैन्य सरकार को निशाना बनाने के लिए ड्रोन युद्ध, ड्रोन संचालन, ड्रोन तैयार करना और जैमिंग तकनीक शामिल थी।
भाषा आशीष नेत्रपाल
नेत्रपाल

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