दिल्ली की अदालत ने मनचंदा मौत मामले में गुरुग्राम पुलिस को फटकार लगाई

दिल्ली की अदालत ने मनचंदा मौत मामले में गुरुग्राम पुलिस को फटकार लगाई

दिल्ली की अदालत ने मनचंदा मौत मामले में गुरुग्राम पुलिस को फटकार लगाई
Modified Date: September 26, 2026 / 09:15 pm IST
Published Date: September 26, 2026 9:15 pm IST

नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को गुरुग्राम पुलिस को रियल एस्टेट पेशेवर युवराज सिंह मनचंदा के शव की बरामदगी और अंतिम संस्कार करने में अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने को लेकर कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि ‘‘किसी शव का सामान (कड़ा और घड़ी) समेत अंतिम संस्कार कैसे किया जा सकता है?’’

न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन ने घटनाक्रम को ‘‘चौंकाने वाली स्थिति’’ बताते हुए पुलिस से कई चूक पर सवाल किए। इनमें जांच की जानकारी कार्यकारी मजिस्ट्रेट को नहीं देना, मृतक के सामान और विसरा को सुरक्षित नहीं रखना, पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी नहीं करना और अज्ञात शव का विवरण समय पर ‘जिपनेट’ पर अपलोड नहीं करना शामिल है।

जिपनेट नेटवर्क के जरिये दिल्ली, हरियाणा और अन्य उत्तरी राज्यों की पुलिस लापता लोगों और अज्ञात शवों की जानकारी साझा करती हैं।

मनचंदा की बहन और याचिकाकर्ता हरसिमरन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद की दलील के बाद अदालत ने पुलिस से सवाल किए।

प्रसाद ने अदालत को बताया कि अंतिम संस्कार स्थल से जली हुई घड़ी और कड़ा बरामद किया गया है।

अदालत हरसिमरन की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उनके भाई की मौत से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने तथा पेश करने का अनुरोध किया गया है।

अदालत ने इस आवेदन पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया और कहा कि वह याचिका में उठाई गई आशंकाओं पर विचार करेगी।

गुरुग्राम के बादशाहपुर थाने के एक पुलिस अधिकारी से न्यायाधीश ने पूछा कि अज्ञात शव मिलने के दूसरे दिन जांच की कार्रवाई के संबंध में निकटतम कार्यकारी मजिस्ट्रेट या उपमंडल मजिस्ट्रेट को सूचना क्यों नहीं दी गई।

अदालत ने अज्ञात शव का विवरण ‘जिपनेट’ पर अपलोड नहीं करने को लेकर भी पुलिस से सवाल किया।

इसने पूछा, ‘‘क्या हत्या या अन्य मामलों में अज्ञात शव का विवरण जिपनेट पर अपलोड नहीं किया जाता? क्या गुरुग्राम पुलिस द्वारा यही प्रक्रिया अपनाई जाती है?’’

न्यायाधीश ने पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि दो रिपोर्ट में महत्वपूर्ण रूप से अलग-अलग निष्कर्ष दिखाई दे रहे हैं, जहां एक रिपोर्ट में गोली लगने की चोटों का उल्लेख था, वहीं दूसरी रिपोर्ट में मौत का कारण पानी में डूबने से दम घुटना बताया गया था।

अदालत ने यह भी कहा कि विसरा सुरक्षित नहीं रखा गया।

इसने पुलिस अधिकारी को सवालों के ठोस जवाब नहीं देने पर फटकार लगाई और कहा कि इन चूक के कारण मनचंदा का परिवार अंतिम संस्कार के अधिकार से भी वंचित रह गया।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘शिकायतकर्ता ने केवल अपने भाई को खोया ही नहीं, बल्कि उसके शव का अंतिम संस्कार कराकर आपने उसके परिवार से विधिपूर्वक अंतिम संस्कार करने का अधिकार भी छीन लिया।’’

प्रसाद ने आरोप लगाया कि शव बरामदगी के बाद उठाए गए कदम सबूत नष्ट करने जैसे थे और इसका उद्देश्य ‘‘दोषियों को बचाना’’ था।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, मनचंदा को आखिरी बार छह सितंबर को लाजपत नगर बाजार में देखा गया था। इसके बाद वह एक बैठक के लिए गुरुग्राम रवाना हुए थे।

पुलिस का आरोप है कि मनचंदा की पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा ने उसी रात उनकी हत्या कर दी और दो दिन तक वत्स की एसयूवी में उनका शव लेकर गुरुग्राम में घूमते रहे। इसके बाद उन्होंने आठ सितंबर को शव को एक सीवर में फेंक दिया।

गुरुग्राम पुलिस ने 10 सितंबर को शव बरामद किया था।

याचिका के अनुसार, 14 सितंबर को शव का अज्ञात के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि मनचंदा के लापता होने के संबंध में 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी थी।

इसमें आरोप लगाया गया है कि 10 सितंबर से 14 सितंबर के बीच अज्ञात शव की तस्वीरें और विवरण ‘जिपनेट’ पर अपलोड नहीं किए गए और उन्हें 16 सितंबर को अपलोड किया गया।

वत्स और सचदेवा को 16 सितंबर को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया था।

भाषा शफीक नेत्रपाल

नेत्रपाल


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