bijli bill/ image source: ibc24
Delhi electricity bill hike:दिल्ली: दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि बिजली बिल बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। यह स्थिति बिजली अपीलीय ट्रिब्यूनल (APTEL) के एक अहम फैसले के बाद बनी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रिब्यूनल ने दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें करीब 30,000 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की समय सीमा बढ़ाने की मांग की गई थी। यह बकाया राशि बिजली वितरण कंपनियों, यानी डिस्कॉम्स, को किए जाने वाले भुगतान से जुड़ी है, जो लंबे समय से लंबित हैं और अब इन्हें चुकाने का दबाव बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि यह रकम बिजली क्षेत्र में ‘रेगुलेटरी एसेट्स’ के रूप में जानी जाती है, जो एक तरह का स्थगित वित्तीय बोझ होता है। DERC ने अपनी अपील में तर्क दिया था कि यदि इस बकाया की वसूली के लिए अधिक समय मिल जाता, तो उपभोक्ताओं पर अचानक पड़ने वाले वित्तीय दबाव को कम किया जा सकता था। हालांकि, APTEL ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और तय समयसीमा के भीतर ही भुगतान करने पर जोर दिया। इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब दिल्ली को पहले से निर्धारित शेड्यूल के अनुसार ही इन बकाया राशियों का निपटारा करना होगा, जिससे वित्तीय दबाव तेजी से सामने आ सकता है।
यह पूरा मामला अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों से जुड़ा है, जिसमें देशभर के बिजली नियामकों को आदेश दिया गया था कि वे अप्रैल 2024 से ऐसे बकाया की वसूली शुरू करें और अप्रैल 2028 तक इस प्रक्रिया को पूरा करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि जरूरी हो, तो बिजली दरों में संशोधन कर इस राशि की वसूली की जा सकती है। दिल्ली के संदर्भ में यह स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है, क्योंकि यहां हाल के वर्षों में बिजली दरें अपेक्षाकृत कम रखी गई हैं, जबकि बकाया लगातार बढ़ता गया है। चूंकि राजधानी में बिजली वितरण निजी कंपनियों के हाथ में है, इसलिए इस वित्तीय बोझ का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है-चाहे वह बढ़े हुए बिजली बिल के रूप में हो, सरकारी सब्सिडी में कटौती के जरिए, या दोनों के संयुक्त प्रभाव के रूप में।