नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) दिल्ली सरकार ने दिल्ली आरोग्य कोष (डीएके) योजना के तहत क्रियान्वयन दिशानिर्देशों में संशोधन किया है ताकि ‘रेफरल’ प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके, पारदर्शिता बढ़ाया जा सके एवं आर्थिक रूप से कमजोर मरीज़ों को समय पर चिकित्सा कराने को प्राथमिकता मिले।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) द्वारा जारी संशोधित निर्देशों के तहत, अधिकारियों से कहा गया है कि वे इस योजना के तहत सर्जरी या उपचार के लिए मरीज़ों को रेफर करने से पहले, चिह्नित निजी अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लिए उपलब्ध मुफ़्त बिस्तरों की उपलब्धता का आकलन करें।
सरकार ने अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया है कि वे सरकारी संस्थानों में उपलब्ध ‘इमेजिंग’ सुविधाओं के इस्तेमाल को प्राथमिकता दें।
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली आरोग्य कोष के तहत ‘इमेजिंग’ सेवाओं के लिए रेफरल अब तभी दिए जाएंगे, जब सरकारी अस्पतालों में ज़रूरी सुविधा उपलब्ध न हो या उसे तय तीन दिन की समय-सीमा के भीतर उपलब्ध न कराया जा सके।
एक और अहम बदलाव के तहत, डीएके के तहत रेफरल की प्रक्रिया शुरू करने से पहले, दिल्ली सरकारी कर्मचारी स्वास्थ्य योजना, केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना या किसी अन्य बीमा ‘कवर’ जैसी योजनाओं के तहत मौजूदा मेडिकल ‘कवरेज’ का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
संशोधित प्रारूप के अनुसार, मरीज़ों को अपने मौजूदा मेडिकल ‘कवरेज’ के संबंध में एक स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा, ताकि लाभों का दोहराव रोका जा सके और स्वास्थ्य योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जा सके।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि ये नए निर्देश यह सुनिश्चित करने में मदद करेंगे कि स्वास्थ्य संसाधनों का उपयोग कुशल और पारदर्शी तरीके से हो, साथ ही ज़रूरतमंद मरीज़ों को बेहतर इलाज मिल सके।
भाषा
राजकुमार अविनाश
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