West Bengal Violence News/Image Credit: IBC24.
West Bengal Violence News: नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की शानदार जीत के बाद नई सरकार की ताजपोशी की तैयारी चल रही है, लेकिन दूसरी तरफ सड़क पर एक अलग ही संग्राम छिड़ गया है। बीजेपी और TMC के बीच झड़प और हिंसा की कई घटनाएं सामने आ रही हैं जिसमें अब तक 2 बीजेपी और 2 TMC कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी हिंसा, तोड़फोड़ और TMC दफ्तरों में आगजनी की घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सवाल है कि केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के बाद भी हिंसा का दौर आखिर क्यों नहीं थम रहा।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे क्या आए बदले की हिंसक राजनीति शुरू हो गई। बीजेपी की बंपर जीत के बाद प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से लगातार TMC के दफ्तर में तोड़फोड़, आगजनी.. बीजेपी-TMC कार्यकर्ताओं में झड़प की तस्वीरे वायरल होने लगी। 4 मई की शाम से शुरू हुआ ये सिलसिला लगातार जारी है। (West Bengal Violence News) जिसमें अब तक 2 बीजेपी और 2 TMC कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है। असनसोल और जगतबल्लभपुर के TMC कार्यालयों को आग के हवाले कर दिया गया। वहीं कूचबिहार, आमतला और सिलीगुड़ी में बीजेपी और TMC कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, तो कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में बुलडोजर से तोड़फोड़ की गई। TMC के पार्टी दफ्तर को भी निशाना बनाया गया। हावड़ा में TMC नेता श्यामलाल को लात-घूंसो से पीटा गया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, तो उधर मुर्शिदाबाद में लेनिन की मूर्ति को तोड़ दिया गया। बंगाल में जारी हिंसा पर पुलिस कमिश्नर अजय कुमार नंद का बयान सामने आया है उन्होंने हिंसा में शामिल 80 लोगों की गिरफ्तारी की बात कही है।
बंगाल में जारी हिंसा पर TMC और बीजेपी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। TMC ने बीजेपी पर निशाना साधा कि जो लोग ‘भय बाहर, भरोसा अंदर’ के नारे के साथ चुनाव लड़े थे वही हमारे कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं। (West Bengal Violence News) वहीं इस पर ममता बनर्जी को चुनाव में हराने वाले सुवेंदु अधिकारी ने पलटवार किया की TMC के राज में 400 BJP कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया, और उन पर बहुत ज़ुल्म ढाए गए।
बंगाल में चुनावी हिंसा का पुराना इतिहास रहा है, लेकिन ऐसा शायद पहली बार है। जब चुनाव बिना किसी बड़ी हिंसा के संपन्न हुए जिसका श्रेय चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती को दिया गया। चुनाव के दौरान ही ये साफ कर दिया गया था कि केंद्रीय बलों की भारी तैनाती चुनाव के बाद भी जारी रहेगी, (West Bengal Violence News) लेकिन अब जब हिंसा का दौर जारी है तो ये सवाल भी उठना लाजमी है कि आखिरी हिंसा करने वाले उपद्रवियों को छूट कैसे मिल रही है और सख्ती क्यों नहीं की जा रही।
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