दिल्ली सरकार ने अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र देने के लिए ‘‘थर्ड-पार्टी ऑडिटर’’ प्रक्रिया शुरू की
दिल्ली सरकार ने अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र देने के लिए ‘‘थर्ड-पार्टी ऑडिटर’’ प्रक्रिया शुरू की
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) दिल्ली सरकार ने इमारतों और विभिन्न परिसर के मालिकों और कब्जेदारों को 10,000 रुपये से लेकर पांच लाख रुपये के शुल्क पर अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ‘थर्ड-पार्टी’ ऑडिटर के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सरकार की दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने बृहस्पतिवार को जारी एक नोटिस में अग्नि सुरक्षा ऑडिटर (थर्ड-पार्टी) के पंजीकरण और उन्हें पैनल में शामिल करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए। ये आवेदन डीएफएस के प्रधान निदेशक के पास जमा किए जाएंगे।
पिछले महीने गृह विभाग की ओर से अधिसूचित किए गए डीएफएस संशोधन नियम, 2025 के अनुसार अग्नि सुरक्षा ऑडिटर की योग्यता और अनुभव के आधार पर तीन स्तर (एल-1, एल-2, एल-3) होंगे।
अभी शहर में डीएफएस आग से सुरक्षा संबंधी प्रमाणपत्र जारी करता रहा है। हालांकि, हाल के महीनों में आग लगने की तीन बड़ी घटनाओं के बाद ‘थर्ड-पार्टी’ ऑडिटर की व्यवस्था करने का फैसला किया गया है। पिछले दिनों दक्षिण दिल्ली के हौज रानी इलाके में एक होटल में लगी आग में 22 लोगों की मौत हो गई थी।
पंजीकरण के लिए जरूरी पेशेवर योग्यता में इंजीनियरिंग में स्नातक (अग्निशमन सुरक्षा में बीई या बीटेक), नागपुर स्थित राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा महाविद्यालय से सब-ऑफिसर पाठ्यक्रम पूरा करना, सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या आर्किटेक्चर में बीई, बीटेक या बी-आर्क और अग्निशमन एवं जीवन सुरक्षा संबंधी ऑडिट में परास्नातक डिप्लोमा वगैरह शामिल है।
अग्निशमन और सुरक्षा में एक से 10 साल का अनुभव भी जरूरी योग्यता होगी। एल-1 और एल-2 स्तर के ऑडिटर 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारतों या जगहों के लिए अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकृत होंगे।
नियमों के अनुसार, सबसे उच्च स्तर के ऑडिटर (एल-3) सभी इमारतों और जगहों के लिए अधिकृत होंगे।
अग्नि सुरक्षा से संबंधी ऑडिटर का पंजीकरण और संबंद्धता तीन साल की अवधि के लिए मान्य होगा। पंजीकरण का शुल्क एल-1 के लिए 10,000 रुपये, एल-2 के लिए 20,000 रुपये और एल-3 के लिए 30,000 रुपये होगा।
अगर निरीक्षण के बाद अग्निशमन विभाग के अधिकारी आग से बचाव और सुरक्षा के जरूरी उपायों का पालन न करने या उनमें कमी पाए जाने या ऑडिटर द्वारा कोई गलत जानकारी देने की रिपोर्ट करते हैं, तो ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाएगा। ऑडिटर द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना राशि एल-1 के लिए ₹दो लाख रुपये, एल-2 के लिए पांच लाख रुपये और एल-3 के लिए ₹10 लाख रुपये होगी।
अगर जुर्माना नहीं भरा जाता है, तो उन्हें बिना किसी और नोटिस के डीएफएस पैनल से ‘ब्लैकलिस्ट’ भी किया जा सकता है।
ऑडिटर को अपनी सेवाओं के लिए किसी इमारत या जगह के मालिक या कब्जेदार से शुल्क लेने की इजाजत होगी। यह शुल्क एल-1 स्तर के ऑडिटर के लिए ₹10,000 से ₹50,000 रुपये, एल-2 स्तर के ऑडिटर के लिए ₹35,000 से ₹90,000 रुपये और एल-3 स्तर के ऑडिटर के लिए ₹63,000 से पांच लाख रुपये के बीच होगा।
भाषा
संतोष अविनाश
अविनाश

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