नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 2022 में एक सड़क दुर्घटना के बाद स्थायी रूप से शत प्रतिशत अशक्त हुए एक व्यक्ति को 1.52 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
पीठासीन अधिकारी सुदीप राज सैनी ने यह आदेश भरत घई की ओर से दायर एक दावा याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। घई 11 फरवरी, 2022 को एक तेज रफ्तार कार की चपेट में आ गए थे जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं।
न्यायाधिकरण ने 16 मार्च के एक आदेश में कहा, ‘‘संभावनाओं की प्रबलता के आधार पर यह सिद्ध हो चुका है कि सुनवाई के लिए आई दुर्घटना प्रतिवादी संख्या 1 (कार चालक) द्वारा संचालित और स्वामित्व वाले मोटर वाहन (चालक) की लापरवाही और तेज गति के कारण हुई, जिससे याचिकाकर्ता को चोटें आईं।’’
न्यायाधिकरण ने पाया कि दुर्घटना के कारण उनके मस्तिष्क में चोट लगी, जिसकी वजह से वह घटना के बाद से बिस्तर पर पड़े हैं और कोमा की स्थिति में हैं।
न्यायाधिकरण ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता अपनी दैनिक आवश्यकताओं और चिकित्सा देखभाल के लिए पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता को अपने पूरे जीवन में कम से कम एक पूर्णकालिक परिचारक की सेवाओं की आवश्यकता होगी।’’
चालक के कानूनी प्रतिनिधियों के इस बचाव को खारिज करते हुए कि वाहन दुर्घटना में शामिल नहीं था, न्यायाधिकरण ने प्राथमिकी, आरोप पत्र, मेडिकल रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर भरोसा करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि दुर्घटना लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई थी।
न्यायाधिकरण द्वारा प्रदत्त कुल मुआवजे में अन्य मदों के अलावा भविष्य की कमाई के नुकसान के लिए करीब 52 लाख रुपये और अस्पताल में भर्ती होने के खर्च के लिए करीब 54 लाख रुपये की राशि शामिल है।
भाषा धीरज पवनेश
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