कर्नल कुरैशी पर टिप्पणी: न्यायालय ने मप्र सरकार को मंत्री पर मुकदमे की मंजूरी का निर्णय लेने को कहा

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कर्नल कुरैशी पर टिप्पणी: न्यायालय ने मप्र सरकार को मंत्री पर मुकदमे की मंजूरी का निर्णय लेने को कहा

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  • Publish Date - May 8, 2026 / 06:59 PM IST,
    Updated On - May 8, 2026 / 06:59 PM IST

नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ मध्यप्रदेश के एक मंत्री की आपत्तिजनक टिप्पणी को ‘‘अत्यधिक दुर्भाग्यपूर्ण’’ करार देते हुए शुक्रवार को राज्य सरकार को कुंवर विजय शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने का निर्देश जारी किया और कहा कि ‘‘बहुत हो गया।’’

मध्यप्रदेश के मंत्री ने यह टिप्पणी ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद की थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मंत्री के आपत्तिजनक बयान को ‘‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’’ करार दिया। इससे पहले, राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मंत्री ने ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ टिप्पणी की, लेकिन तुरंत माफी मांग ली।

मेहता ने कहा, ‘‘उन्होंने जो कहा वह निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि अत्यधिक दुर्भाग्यपूर्ण है और उन्हें कोई पछतावा नहीं हो रहा है।’’

पीठ ने मंत्री और राज्य सरकार की ओर से आगे की दलीलें सुनने से इनकार कर दिया और मध्यप्रदेश सरकार को (मुकदमे की) मंजूरी देने के संबंध में उपयुक्त निर्णय लेने के लिए 19 जनवरी के अपने निर्देश का चार सप्ताह के भीतर पालन करने को कहा।

न्यायालय ने राज्य सरकार से कहा, ‘‘बहुत हो गया। आप हमारे पिछले निर्देश में पैराग्राफ पांच और छह में दिए गए आदेश का पालन करें।’’ पीठ ने मामले को गर्मियों की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध किया।

सुनवाई की शुरुआत में, मेहता ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इस मामले में एक रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

कर्नल कुरैशी के संबंध में की गई ‘‘अपमानजनक’’ और ‘‘आपत्तिजनक’’ टिप्पणियों के लिए मंत्री को उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी जांच का सामना करना पड़ा।

मेहता ने स्पष्ट किया कि वह शाह का बचाव नहीं कर रहे हैं, लेकिन संभवतः मंत्री का इरादा अधिकारी की प्रशंसा करने का था, लेकिन उन्होंने कुछ और कह दिया और उसे ठीक से व्यक्त नहीं कर पाए।

शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि यह उनका निजी विचार था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि अगर इन राजनीतिक हस्तियों को किसी की प्रशंसा करनी हो, तो वे अपने शब्दों को कितनी कुशलता से व्यक्त करते हैं।’’ उन्होंने कहा कि अगर यह जुबान फिसलने की बात थी, तो वह जल्द ही माफी मांग सकते थे।

कुंवर विजय शाह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि मंत्री ने तुरंत माफी मांग ली थी।

पीठ ने कहा कि 19 जनवरी के उसके आदेश के अनुसार, राज्य सरकार को मंजूरी देने के संबंध में दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेना था।

पीठ ने कहा, ‘‘राज्य सरकार इस संबंध में निर्णय ले।’’

न्यायालय ने 19 जनवरी को कहा था कि एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है।

हालांकि, आगे की कार्यवाही रुकी हुई है क्योंकि रिपोर्ट को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 के तहत राज्य सरकार की अनिवार्य मंजूरी का इंतजार है। यह धारा सांप्रदायिक घृणा और दुर्भावना को बढ़ावा देने से संबंधित है।

न्यायालय ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट खोलकर उसका अवलोकन किया और पाया कि पैनल ने विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद शाह पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी मांगी थी।

एक वीडियो वायरल होने के बाद मंत्री की व्यापक आलोचना हुई थी। वीडियो में उन्हें कर्नल कुरैशी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए सुना गया था। कुरैशी ने विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ ऑपरेशन सिंदूर पर संवाददाता सम्मेलन किया था और दोनों महिला अधिकारियों की देशभर में खूब सराहना हुई थी।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश