दिल्ली उच्च न्यायालय ने वांगचुक को तत्काल मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की अनुमति दी

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने वांगचुक को तत्काल मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की अनुमति दी

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 04:22 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 04:22 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 28 जून से अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तत्काल सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने का मंगलवार को आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की उस याचिका पर यह आदेश दिया, जिसमें एकल पीठ के रविवार के आदेश को चुनौती दी गई थी।

एकल पीठ ने सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक का किये जा रहे उपचार में दखल देने से इनकार कर दिया था।

अदालत ने मेदांता अस्पताल के निदेशक को वांगचुक की लगातार देखभाल के लिए जरूरी विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों की एक टीम गठित करने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि चिकित्सक स्वीकृत चिकित्सा मानकों और निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल के अनुसार ही दवाएं देंगे और ‘‘अपीलकर्ता के पति को इस उपचार व्यवस्था और प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।’’

अदालत ने कहा कि वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल, अर्थात् मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। इससे उन्हें संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत प्रदत्त उनके मौलिक अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गीतांजलि आंग्मो को अपनी इच्छानुसार कभी भी वांगचुक से मिलने की अनुमति होगी।

मामले का निपटारा करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘हमारा सरोकार (वांगचुक के) मौलिक अधिकारों से है। इसके अलावा जो कुछ भी हो रहा है, उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।’’

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किए जाने पर केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि वांगचुक को चिकित्सकीय सलाह के बिना मेदांता अस्पताल से छुट्टी की मांग नहीं करनी चाहिए।

मेहता ने कहा, ‘‘मेदांता एक प्रतिष्ठित अस्पताल है। यदि उन्हें (वांगचुक को) वहां स्थानांतरित किया जाता है, तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं।’’

सुनवाई के दौरान, पीठ ने सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक के उपचार की निगरानी कर रहे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों और जलवायु कार्यकर्ता के निजी चिकित्सक से भी बातचीत की। अदालत ने पाया कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि वांगचुक को लगातार निगरानी की जरूरत है।

आंग्मो ने अपनी अपील में कहा था कि एकल न्यायाधीश का रविवार का आदेश बिना किसी गिरफ्तारी के ही वांगचुक को अवैध रूप से सफदरजंग अस्पताल में रहने के लिए बाध्य करता है और यह निर्देश देता है कि न तो वांगचुक और न ही उनकी पत्नी के पास उनके चिकित्सीय उपचार से संबंधित निर्णय लेने का अंतिम अधिकार है।

न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में जारी इलाज के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

उन्होंने कहा था सरकार द्वारा वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को मनमाना नहीं माना जा सकता।

दिल्ली पुलिस शनिवार को वांगचुक को उनके अनशन के 21वें दिन जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से ‘‘बलपूर्वक’’ सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। इसके अगले दिन आंग्मो ने अदालत का रुख कर याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।

भाषा

खारी सुरेश

सुरेश