दिल्ली उच्च न्यायालय ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने पर खंडित फैसला सुनाया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने पर खंडित फैसला सुनाया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने पर खंडित फैसला सुनाया
Modified Date: November 29, 2022 / 08:55 pm IST
Published Date: May 11, 2022 3:13 pm IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने के मामले में बुधवार को खंडित फैसला सुनाया और पक्षकारों को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने की छूट दी।

खंडपीठ की अगुवाई कर रहे न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने वैवाहिक बलात्कार के अपवाद को समाप्त करने का समर्थन किया, जबकि न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर ने कहा कि भारतीय दंड संहिता के तहत प्रदत्त यह अपवाद असंवैधानिक नहीं हैं और संबंधित फर्क आसानी से समझ में आने वाला है।

याचिकाकर्ताओं ने भारतीय दंड संहिता की धारा 375 (बलात्कार) के तहत वैवाहिक बलात्कार के अपवाद की संवैधानिकता को इस आधार पर चुनौती दी है कि यह अपवाद उन विवाहित महिलाओं के साथ भेदभाव करता है, जिनका उनके पतियों द्वारा यौन उत्पीड़न किया जाता है।

इस अपवाद के अनुसार, यदि पत्नी नाबालिग नहीं है, तो उसके पति का उसके साथ यौन संबंध बनाना या यौन कृत्य करना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता।

भाषा

सिम्मी सुरेश

सुरेश


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