दिल्ली उच्च न्यायालय ने पेड़ों के प्रतिरोपण मामले में शहर के दो अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने पेड़ों के प्रतिरोपण मामले में शहर के दो अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 09:20 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 09:20 PM IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शहर के वन विभाग के दो अधिकारियों को समुचित विचार-विमर्श के बिना यहां ग्रेटर कैलाश-2 में दो पूर्ण विकसित पेड़ों के प्रतिरोपण की अनुमति देने के मामले में अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि वृक्षाधिकारी (दक्षिण वन प्रभाग) मंदीप मित्तल और वन एवं वन्यजीव विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सी डी सिंह ने उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए काम किया और वे कानून के अनुसार दंड के पात्र हैं।

दो पेड़ों के प्रतिरोपण की अनुमति इसलिए दी गई थी क्योंकि वे निर्माणाधीन इमारत के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने स्थित थे। अदालत ने कहा कि यह वृक्षाधिकारी द्वारा मंजूरी देने के लिए ‘‘पर्याप्त रूप से अच्छा’’ कारण नहीं था।

न्यायाधीश ने कहा कि वृक्षाधिकारी न्यायिक आदेशों से अवगत थे और उन्हें पूरी जानकारी थी कि पेड़ों को काटने या उनके प्रतिरोपण की अनुमति देने के कारणों को उचित विचार-विमर्श के बाद दर्ज किया जाना आवश्यक है।

अदालत ने 22 जुलाई के आदेश में कहा, ‘‘यदि इमारतों के निर्माण के लिए और किसी खास भूखंड के मुख्य प्रवेश एवं निकास द्वार के सामने पेड़ होने के आधार पर पेड़ों को काटने/प्रतिरोपण की अनुमति दी जाती रही, तो जल्द ही ऐसी स्थिति आ जाएगी कि कॉलोनी में कोई पेड़ नहीं बचेगा, क्योंकि अधिकतर पेड़ परिसर की चारदीवारी के बाहर फुटपाथ पर लगाए गए हैं।’’

भाषा तान्या नेत्रपाल

नेत्रपाल