दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानव तस्करी मामले में सोनू पंजाबन की सजा रद्द की

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानव तस्करी मामले में सोनू पंजाबन की सजा रद्द की

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  • Publish Date - March 24, 2026 / 08:02 PM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 08:02 PM IST

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 वर्षीय एक बच्ची की कथित तस्करी के मामले में गीता अरोडा़ उर्फ ​​सोनू पंजाबन की दोषसिद्धि और 24 साल की जेल की सजा मंगलवार को रद्द कर दी और उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।

न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा ने सह-आरोपी संदीप बेदवाल को भी राहत दी, जिसे दिल्ली पुलिस द्वारा जांच किए गए इस मामले में 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

अदालत ने दोनों आरोपियों की अपीलों पर अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही में ‘महत्वपूर्ण विरोधाभास, परिवर्तन और विसंगतियां’ थीं और उसके आचरण ने उसकी विश्वसनीयता पर ‘गंभीर संदेह’ पैदा किया।

अदालत ने माना कि ‘अभियोजन पक्ष की कहानी में कई खामियां थीं’ और किसी स्वतंत्र पुष्टि के अभाव में, पीड़िता की गवाही के आधार पर अपीलकर्ताओं की दोषसिद्धि को बरकरार रखना असुरक्षित है।

अदालत ने फैसला सुनाया, ‘‘इन परिस्थितियों में, यह माना जा सकता है कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री ए1 और ए2 को उनके खिलाफ लगाए गए अपराधों के लिए दोषी ठहराने के लिए अपर्याप्त है। इसलिए, निष्कर्ष यही निकलता है कि निचली अदालत ने ऐसे असंतोषजनक साक्ष्यों पर भरोसा करके आरोपियों को दोषी ठहराने में गलती की।’’

अदालत ने कहा, ‘‘नतीजतन, अपीलें स्वीकार की जाती हैं और दोषसिद्धि एवं सजा संबंधी आदेश रद्द किए जाते हैं। उन्हें रिहा किया जाता है और उनके संबंधित जमानत बांड रद्द किए जाते हैं।’’

अभियोजन पक्ष के अनुसार, लगभग 12 वर्षीय पीड़िता का 2009 में अपहरण कर लिया गया था। आरोप लगाया गया कि बेदवाल ने विवाह का झांसा देकर उसे बहला-फुसलाकर उसके साथ बलात्कार किया और फिर उसे कई लोगों को बेच दिया, जिन्होंने उसे वेश्यावृत्ति में धकेल दिया और उसका यौन शोषण किया।

दावा किया गया कि इस तस्करी के दौरान, पीड़िता को अंततः सोनू पंजाबन को बेच दिया गया जिसने उसे वेश्यावृत्ति के लिए इस्तेमाल किया और फिर उसे अन्य लोगों को बेच दिया।

निर्णय में, अदालत ने कहा कि इस मामले की जांच में गंभीर खामियां थीं क्योंकि तस्करी की कड़ी में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों की न तो ठीक से पहचान की गई और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह स्थापित करने में विफल रहा कि पीड़िता सोनू पंजाबन की हिरासत में कब थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष सोनू पंजाबन को कथित कृत्यों से जोड़ने वाली कोई स्पष्ट और ठोस समयरेखा स्थापित करने में विफल रहा है, इसलिए संदेह का लाभ निश्चित रूप से अपीलकर्ता को मिलना चाहिए।

पीड़िता के बयान में मौजूद विसंगतियों के संबंध में, अदालत ने कहा कि घटना के वर्ष को लेकर हुई विसंगति मामूली नहीं थी, क्योंकि यह अभियोजन पक्ष के मामले की बुनियाद से जुड़ी थी।

अदालत ने यह भी कहा कि बेदवाल के खिलाफ बलात्कार के आरोप में जांच-पड़ताल से लेकर मुकदमे की सुनवाई तक काफी बदलाव हुए।

सोनू पंजाबन का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने किया।

जुलाई 2020 में, निचली अदालत ने सोनू पंजाबन को अनैतिक देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम के तहत अपराधों के लिए 14 साल की सजा सुनाई थी जबकि भारतीय दंड संहिता के तहत अन्य अपराधों के लिए 10 साल की सजा सुनायी थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि सजाएं अलग-अलग चलेंगी।

भाषा अमित नरेश

नरेश