Teacher Recruitment Candidates Protest/Image Credit: IBC24.in
Teacher Recruitment Candidates Protest: भोपाल: मध्यप्रदेश में आज शिक्षक भर्ती में पद वृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों की मौजूदगी रही, और कुछ ने तो बकायदा मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखकर विरोध जताया। एक तरफ नियुक्ति, प्रमोशन सहित तमाम मांगों को लेकर चयनित शिक्षकों ने आंदोलन का आगाज किया तो सियासतदान भी राजनीति करने से बाज नहीं आए।
भोपाल में प्रदर्शन करते और अपने खून से सरकार को चिट्ठियां लिखते ये टीचर्स एलीजबिल टेस्ट यानी TET पास कर चुके युवा है। एमपी में सरकारी स्कूल में शिक्षक बनने की ये पात्रता परीक्षा है। इनकी मांग है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में टीचर्स के रिक्त पदों पर इनकी नियुक्ति की जाए। इनकी संख्या है तकरीबन पचास हज़ार और एमपी में खाली पद हैं (Teacher Recruitment Candidates Protest) एक लाख से अधिक ऐसे में देखा जाए तो इनकी मांगों में दम तो दिखता है।
Teacher Recruitment Candidates Protest: सरकार ने पिछले दिनों एक आदेश निकाला है जिसमें कहा गया है कि, जो अभी सरकारी टीचर हैं वे भी आगे तभी कंटिन्यू कर पाएंगे जब वे इस TETको पास कर पाएंगे। ज़ाहिर है कि इस मांग के साथ सियासत का इन्वॉल्व होना भी तय था, तो सबसे पहले कांग्रेस इनके समर्थन में आई। पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा सामने आए और आरोप लगाया कि, शिक्षक नहीं बल्कि स्कूली शिक्षा बर्बाद करना चाहती है सरकार। जवाब भाजपा की तरफ़ से भी आया। भाजपा का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार कर्मचारी हितेषी सरकार है। प्रदेश के युवाओं को बेरोजगारों को नौकरी देने के लिए एक कैलेंडर बनाया गया है। (Teacher Recruitment Candidates Protest) इसी के अंतर्गत जो शिक्षक चयनित हुए हैं उन्हें भी नौकरी दी जाएगी।
Teacher Recruitment Candidates Protest: सियासत से इतर ज़रा जमीनी सूरत-ऐ-हाल पर नज़र डाल लेते हैं। कैग की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1 लाख से अधिक टीचर्स के पद रिक्त हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में 8,500 से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे है। ऐसे में सवाल उठता है कि शिक्षा जैसे बुनियादी विषयों-पर वरीयता में भर्ती क्यूं नहीं की जा रही हैं। (Teacher Recruitment Candidates Protest) सवाल ये भी कि अर्बन इलाकों के ही स्कूल भरे हैं ग्रामीण के नहीं। मतलब चयनित होते ही ये शिक्षक जुगाड़ लगाकर शहरी इलाकों में क्यूूं आ जाते हैं। सवाल ये भी कि अभी राजनीति चमकाने वाली कांग्रेस सरकार के राज में स्कूलों में टीचर्स की स्थिति कोई बहुत अच्छी नहीं थी फिर किस मुंह से वो अभी इस आन्दोलन का समर्थन कर रही है।
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