अलगाववादी आसिया अंद्राबी को भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के मामले में आजीवन कारावास

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अलगाववादी आसिया अंद्राबी को भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के मामले में आजीवन कारावास

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  • Publish Date - March 24, 2026 / 11:29 PM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 11:29 PM IST

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदरजीत सिंह ने सजा की अवधि पर दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुनाया।

अदालत ने अंद्राबी की दो सहयोगियों – सोफी फेहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी इसी मामले में दोषी पाए जाने पर 30 साल कैद की सजा सुनाई।

इस साल जनवरी में मामले में अंद्राबी (62), नसरीन (58) और फेहमीदा (48) को दोषी ठहराने के बाद अदालत ने उनके लिए सजा की मात्रा पर कारण बताते हुए 28 पृष्ठ का आदेश दिया।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘दोषियों में से किसी ने भी अपने कृत्यों के प्रति कोई पश्चाताप नहीं दिखाया है, बल्कि यह कहा गया है कि उन्हें अपने किए पर गर्व है और वे आगे भी वही काम करते रहेंगे।’’

उन्होंने इस मामले की तुलना 26/11 मुंबई हमलों के दोषी और गिरफ्तार किए गए अकेले आतंकवादी अजमल कसाब के मामले से की, जिसने अपने कृत्य के लिए कोई पश्चाताप व्यक्त नहीं किया था।

अदालत ने यह तर्क भी दिया कि दोषी के प्रति किसी भी प्रकार की सहनशीलता दिखाने से समान विचारों वाले अन्य लोगों को यह संदेश जा सकता है कि वे कुछ वर्षों के कारावास के माध्यम से ऐसे कृत्यों से बच सकते हैं और इससे भारत के एक हिस्से में अलगाव संबंधी विचारों को बढ़ावा मिल सकता है।

न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी प्रकार की नरमी दिखाने से दोषियों की उस भावना में नयी जान और जोश भर जाएगा जिसका उद्देश्य भारत के एक अभिन्न अंग को अलग करना है।

इसने अंद्राबी को सख्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18 (षड्यंत्र के लिए सजा) और पूर्ववर्ती भादंसं की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 121ए के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

यूएपीए की धारा 16 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति आतंकवादी कृत्य करता है, यदि ऐसे कृत्य के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

धारा 121 ए ‘धारा 121’ के तहत दंडनीय अपराधों को अंजाम देने की साजिश से संबंधित है। धारा 121 के अनुसार, ‘‘अगर कोई व्यक्ति राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ता है, या ऐसा युद्ध छेड़ने का प्रयास करता है, या ऐसा युद्ध छेड़ने में सहायता करता है, उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।’’

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि सजाएं एक साथ चलेंगी।

फेहमीदा और नसरीन को यूएपीए की धारा 18 और भांदंसं की धारा 120बी के तहत 30 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई।

तीनों को 14 जनवरी को दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण(एनआईए) ने यह कहते हुए अंद्राबी के लिए आजीवन कारावास की मांग की थी कि उसने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ा था।

एनआईए ने कहा था कि कड़ा संदेश भेजना आवश्यक है कि देश के खिलाफ षड्यंत्र करने पर अत्यधिक कठोर सजा दी जाएगी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अंद्राबी और उसके सहयोगियों ने कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रची थी।

इसने कहा कि एनआईए द्वारा प्रस्तुत वीडियो से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि संबंधित लोगों ने बार-बार दावा किया कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा है और भारत ने इस पर जबरन कब्जा कर रखा है।

आदेश में कहा गया कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री में सभी आरोपियों, विशेष रूप से आरोपी नंबर 1 (अंद्राबी) के ऐसे भाषणों और विभिन्न पोस्ट के प्रमाण मिलते हैं।

इसमें कहा गया कि अंद्राबी ने अपने भाषणों और साक्षात्कारों में स्पष्ट रूप से इस बात की वकालत की और पाकिस्तान से इस दुष्प्रचार के लिए समर्थन मांगा कि कश्मीर कभी भारत का हिस्सा नहीं था।

आदेश में कहा गया कि यह देखा गया कि अंद्राबी द्वारा स्थापित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत ‘‘आत्मनिर्णय के अधिकार के दावे के बहाने’’ भारत के एक अभिन्न अंग को भारत से अलग करने से संबंधित गतिविधियों में शामिल रहा है।

अदालत ने आदेश में कहा, ‘‘आरोपियों ने यह झूठा दावा करने की कोशिश की है कि कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है और अवैध रूप से भारत के कब्जे में है।’’

इसने यह भी कहा कि आरोपियों ने इस बात को बढ़ावा देने के लिए एक विमर्श को आगे बढ़ाया कि भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन धार्मिक पृष्ठभूमि पर आधारित द्वि-राष्ट्र सिद्धांत पर आधारित था।

अंद्राबी और उसकी दो सहयोगियों पर फरवरी 2021 में यूएपीए तथा भादंसं के तहत कई अपराधों के संबंध में औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए थे।

भाषा नेत्रपाल अमित रंजन

रंजन