नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) दिल्ली के एक अस्पताल ने पित्ताशय की पथरी के कारण पेट के ऊपरी हिस्से में बार-बार होने वाले दर्द से पीड़ित 35 वर्षीय महिला का इलाज ‘मिनी-लैप्रोस्कोपिक’ तकनीक से किया है।
इस तकनीक में सर्जरी के दौरान बहुत छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे मरीज को दर्द कम होता है और वह तेजी से ठीक होता है तथा शरीर पर बहुत कम निशान पड़ते हैं।
सर गंगा राम अस्पताल द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर का एकमात्र अस्पताल है जो ‘5-5-2-2’ तकनीक का उपयोग करके पित्ताशय को निकालने के लिए मिनी-लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी की सुविधा प्रदान करता है। ‘5-5-2-2’ तकनीक एक अत्याधुनिक मिनी-लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया है, जिसमें पांच मिमी और दो मिमी आकार के बेहद छोटे चीरे लगाए जाते हैं। पारंपरिक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की तुलना में इसमें चीरे छोटे होते हैं, जिससे दर्द, रक्तस्राव और शरीर पर निशान कम पड़ते हैं तथा मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकता है।
अस्पताल ने कहा कि हाल में 35 वर्षीय महिला ने अस्पताल में यह प्रक्रिया करवाई। वह लंबे समय से पित्ताशय में पथरी और पेट के ऊपरी हिस्से में बार-बार होने वाले दर्द से परेशान थी। वह इलाज के बाद शरीर पर पड़ने वाले निशानों को लेकर भी चिंतित थी।
इसने कहा कि सर्जरी सफलतापूर्वक की गई और ऑपरेशन के केवल दो घंटे बाद ही मरीज आराम से बैठने और चलने लगी। उसे बहुत कम दर्दनिवारक दवाओं की आवश्यकता पड़ी और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल में लैप्रोस्कोपिक, लेजर एवं जनरल सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. तरुण मित्तल ने कहा “ पाया गया है कि ‘5-5-2-2’ तकनीक द्वारा मिनी कोलेसिस्टेक्टॉमी से ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है। इससे मरीजों को कम दर्द होता है, वे तेजी से ठीक होते हैं और शरीर पर भी कम निशान पड़ते हैं।”
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नोमान संतोष
संतोष