(सौम्या शुक्ला)
नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) अदालती कार्यवाही में तेजी लाने और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी करने वाली प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करने के उद्देश्य से दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी की अदालतों में तैनात पैरवी अधिकारियों की भूमिका, जिम्मेदारियों और जवाबदेही को परिभाषित किया गया है।
तीन फरवरी के इस आदेश का उद्देश्य जांच अधिकारियों, अभियोजकों और अदालतों के बीच समन्वय को मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति या अदालती निर्देशों के अनुपालन में देरी जैसी चूक न्यायिक प्रक्रिया में बाधा न डालें।
आदेश में जिक्र किया गया है कि जांच अधिकारी (आईओ) की अनुपस्थिति या अदालत के निर्देशों का समय पर पालन न करने के कारण अदालती कार्यवाही में अक्सर देरी होती है।
आदेश में पैरवी अधिकारियों को अदालतों, अभियोजन पक्ष, पुलिस थानों, जांच इकाइयों और गवाहों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करने का निर्देश दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो कि इस तरह की चूक को कम से कम किया जा सके।
आदेश में कहा गया, ‘‘यह देखा गया है कि कई मामलों या अदालती कार्यवाही में जांच अधिकारी (आईओ) की अनुपस्थिति या अदालत के निर्देशों का समय पर पालन न करने के कारण देरी हो रही है। पैरवी अधिकारी को अदालतों में सुनवाई के लिए निर्धारित मामलों की बेहतर पैरवी सुनिश्चित करनी होगी और मामलों के जांच अधिकारियों पर बोझ कम करना होगा।’’
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, उच्च न्यायालय में पैरवी अधिकारियों को रिट याचिकाओं, अपीलों, जमानत आवेदनों या विविध आवेदनों की स्वीकृति के बारे में तुरंत विधि प्रकोष्ठ को लिखित रूप में सूचित करना होगा।
इसके अनुसार, उन्हें प्रतिदिन अद्यतन होने वाला पैरवी रजिस्टर बनाना होगा, वकालतनामा, जवाबी हलफनामा और वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए स्थायी वकीलों और अभियोजकों के साथ समन्वय करना होगा, और यह सुनिश्चित करना होगा कि सुनवाई की अगली तिथि से काफी पहले जवाब तैयार कर लिये जाएं।
भाषा शफीक सुरेश
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