दिल्ली पुलिस ने साढ़े पांच लाख रुपये की ठगी के आरोप में तीन साइबर जालसाज़ों को पकड़ा

दिल्ली पुलिस ने साढ़े पांच लाख रुपये की ठगी के आरोप में तीन साइबर जालसाज़ों को पकड़ा

दिल्ली पुलिस ने साढ़े पांच लाख रुपये की ठगी के आरोप में तीन साइबर जालसाज़ों को पकड़ा
Modified Date: September 22, 2026 / 09:58 pm IST
Published Date: September 22, 2026 9:58 pm IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने निवेश के नाम पर राष्ट्रीय राजधानी की एक महिला से साढ़े पांच लाख रुपये की साइबर ठगी करने के आरोप में नोएडा से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि आरोपियों के कब्जे से 40 मोबाइल फोन, 146 सिम कार्ड, 86 डेबिट कार्ड और अन्य बैंकिंग और डिजिटल सामग्री जब्त की गयी है।

उन्होंने बताया कि आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी पीयूष बाला (28), कर्नाटक निवासी भरत जी. पुजारी (32) और उत्तर प्रदेश के सूरज कुमार (24) के रूप में हुई है।

अधिकारियों ने बताया कि इसी वर्ष जुलाई में निवेश के नाम पर ठगी का मामला सामने आया था जिसके बाद जांच शुरू की गई।

शिकायतकर्ता ने बताया कि सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते समय उन्हें निवेश से जुड़ा एक विज्ञापन दिखाई दिया और लिंक पर क्लिक करते ही वह ‘फंड इंवेस्ट’ नाम के एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ दी गईं जहां एडमिन निवेश के टिप्स देते थे और मोटे रिटर्न का वादा करके उन्हें शेयर बाजार में निवेश करने के लिए उकसाते थे।

पुलिस ने बताया कि इसी तरह ठगों ने पीड़िता से साढ़े पांच लाख रुपये अंतरित करा लिए।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने जांच में यह जानकारी जुटाई कि पैसे किन खातों में भेजे गए थे। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने उस बैंक खाते के लाभार्थी का पता नोएडा के सेक्टर-137 स्थित एक आवासीय सोसायटी में लगाया, जिसमें 2.5 लाख रुपये जमा किए गए थे।

उन्होंने बताया कि उक्त स्थान पर छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने इनके पास से 40 मोबाइल, 146 सिम कार्ड, 86 डेबिट कार्ड, तीन लैपटॉप, 28 चेक बुक, 18 पासबुक, तीन पासपोर्ट, एक लाख से अधिक नकद और अन्य डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने बताया कि वे इंस्टाग्राम के जरिए गिरोह के अन्य सदस्यों के संपर्क में आए थे। वे अकाउंट ‘लॉग-इन’ और भुगतान सत्यापन से जुड़े कामों में शामिल थे और वे अन्य सदस्यों को मोबाइल और बैंकिंग सामग्री कथित तौर पर उपलब्ध कराते थे।

भाषा नोमान नोमान अविनाश

अविनाश


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