दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर हमला मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया

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दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर हमला मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 09:25 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 09:25 PM IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर धरना स्थल पर 23 जून को हुए हमले के मामले से निपटने में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को बृहस्पतिवार को खारिज करते हुए कहा कि दोनों आरोपियों के साथ कानून के अनुसार व्यवहार किया गया था।

पुलिस की प्रतिक्रिया तब आई जब एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति यह दावा करता हुआ पाया गया कि उसने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के एक प्रदर्शनकारी के पिता पर बेरहमी से हमला किया और एक कॉल के जरिए जेल जाने से बच गया।

वीडियो में, व्यक्ति का दावा है कि जिस शख्स पर उसने कथित तौर पर हमला किया था, उसे 60 टांके आए थे और वह मरने की कगार पर था। वह कहता है कि उसके खिलाफ हत्या के प्रयास से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए था।

वीडियो में शख्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘अगले दिन स्वतंत्र जेल से बाहर आ गया। मुझे जेल जाने की जरूरत भी नहीं पड़ी। मैंने पुलिस को यह कहते हुए सुना कि उन्हें कपिल मिश्रा का फोन आया था। वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं।’

पुलिस के मुताबिक, ये दावे 23 जून को कॉजपा के विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर हुई घटना से संबंधित हैं, जब गाजियाबाद के रहने वाले 38 वर्षीय संजय कुमार को झड़प के दौरान सिर में चोट लगी थी।

नयी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने कहा कि 23 जून को जंतर-मंतर पर, कॉजपा के विरोध प्रदर्शन के दौरान, गाजियाबाद के रहने वाले कुमार को हाथापाई के दौरान कथित हमलावरों में से एक द्वारा पहने गए कड़े से सिर में चोट लगी थी।

उन्होंने कहा कि कुमार की आरएमएल अस्पताल में चिकित्सकीय जांच की गई और चोटों की प्रकृति ‘सामान्य’ बताई गई।

डीसीपी ने कहा, ‘चोटें कड़े से लगी हैं, किसी हथियार से नहीं। खोपड़ी में दरार के दावों की पुष्टि तथ्यों/एमएलसी रिपोर्ट से नहीं होती है और यह पूरी तरह से निराधार हैं।

पुलिस के अनुसार, कुमार के बयान पर संसद मार्ग थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान नामज़द दो लोगों, 24 वर्षीय सूरज कुमार और 21 वर्षीय स्वतंत्र भारद्वाज को मौके से हिरासत में लिया गया और बाद में कानून के अनुसार नोटिस दिया गया और पूछताछ की गई। साथ ही सक्षम अदालत के सामने आरोप पत्र भी दायर किया जाएगा।

मामले में राजनीतिक प्रभाव के आरोप को खारिज करते हुए डीसीपी ने स्पष्ट किया कि जांच में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है।

शर्मा ने कहा, ‘इस मामले में अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप का कोई भी आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार है। मामले को कानून और प्रक्रियाओं के अनुसार सख्ती से निपटाया गया है।’

भाषा नोमान नोमान रंजन

रंजन