शह मात The Big Debate: जाति वाली चाय पर बवाल.. सियासी केतली में उबाल! 24 घंटों में कांग्रेस पर BJP का दूसरा अटैक, नए भारत में अब भी जाति वाला दांव क्यों?

Ads

जाति वाली चाय पर बवाल.. सियासी केतली में उबाल! 24 घंटों में कांग्रेस पर BJP का दूसरा अटैक, Uproar over caste tea in Chhattisgarh

  • Reported By: Rajesh Raj

    ,
  •  
  • Publish Date - September 3, 2026 / 11:53 PM IST,
    Updated On - September 4, 2026 / 12:22 AM IST

रायपुरः Chhattisgarh News छत्तीसगढ़ में इन दिनों सोशल मीडिया, सियासी एजेंडे सेट करने का बड़ा मंच बन चुका है। ताजा हमला कांग्रेस के सबसे बड़े फेस राहुल गांधी पर हुआ है। उन्हें अपने ही नेताओं को जातिवादी सोच के मुताबिक भेदभाव वाली चाय परोसते दर्शाया गया। वार सीधा और तीखा था। कांग्रेसी नेताओं ने भी पूरी ताकत से विरोध किया।

छत्तीसगढ भाजपा के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट इसी तस्वीर पर सियासी बहस छिड़ी है। पोस्टर में राहुल गांधी छत्तीसगढ़ के तीन नेताओं को चाय परोस रहे हैं, पूर्व मंत्री शिव डहरिया SC समाज से आते हैं, उन्हें प्लास्टिक के डिस्पोजल ग्लास में चाय देते दिखाए गए। पूर्व CM भूपेश बघेल OBC वर्ग से आते हैं। उन्हें कागज के कप में चाय देते दर्शाया। TS सिंहदेव सवर्ण समाज से आते हैं, उन्हें ग्लास की प्याली में चाय परोसी गई। भाजपा ने इस पोस्टर के जरिए सीधा आरोप लगाया कि अगर कोई भेदभाव पैदा करते हैं तो वो राहुल गांधी हैं। ये भी कहने का प्रयास किया कि आम लोग तो दूर, छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता तक भी इस भेद-भाव नहीं बच पा रहे हैं। अब चूंकि अटैक सीधे राहुल गांधी पर है सो छग कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने मोर्चा संभाला, पूर्व PCC अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने पलटवार में कहा कि RSS और BJP से बढके जातिवादी कोई नहीं साथ ही तंज कसा कि कांग्रेस की लोकप्रियता बढ़ते देख बीजेपी ऐसे फिजूल आरोप लगा रही है।

Chhattisgarh News वैसे, बीते 24 घंटों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भाजपा का ये दूसरा अटैक था। इससे पहले एक और वीडियो पोस्ट हुआ, जिसमें दलित समाज से आने वाले बीकानेर कांग्रेस जिला अध्यक्ष मदन मेघवाल को कांग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा बुरी तरह पीटे जाने को दर्शाया। इन हमलों की वजह भी है, बीते दिनों दिल्ली में राहुल गांधी ने दलितों- पिछड़ों के साथ भेदभाव के पीछे RSS- भाजपा की मनुवादी सोच को जिम्मेदार बताया था। सवाल ये है कि, वास्तव में कौन है जो जातिवाद के जहर वाली सियासी चाय परोसने से गुरेज नहीं कर रहा है?