नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में सितंबर महीने का समापन मौसम से संबंधित तीन प्रमुख रिकॉर्ड के साथ हुआ। आंकड़ों के अनुसार, इस साल सितंबर में दिल्ली की वायु गुणवत्ता पिछले पांच साल में सबसे बेहतर रही, रातें बीते छह साल में सबसे गर्म रहीं, जबकि मानसून के सक्रिय रहने की अवधि 14 साल में सबसे कम रही।
मौसम विज्ञान संस्था ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) के विश्लेषण के अनुसार, मंगलवार तक सितंबर में दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 102 रहा, जो 2021 के बाद सबसे कम है। वर्ष 2021 में सितंबर महीने का औसत एक्यूआई 78 था।
सीआरईए के अनुसार, इस दौरान दैनिक एक्यूआई 53 से 178 के बीच रहा। अठाईस सितंबर तक 12 दिन हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ और 16 दिन ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रही।
सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मानसून के दौरान दिल्ली की बेहतर वायु गुणवत्ता केवल बारिश पर निर्भर नहीं करती। हवा की गति और दिशा, वायुमंडल में अधिक मिश्रण और दिल्ली-एनसीआर की व्यापक मौसमी परिस्थितियां प्रदूषण को फैलाने में भूमिका निभाती हैं।’’
उन्होंने कहा कि यही वजह है कि पिछले साल की तुलना में कम बारिश के बावजूद शहर की हवा अपेक्षाकृत साफ रही। मानसून की वापसी और मौसमी परिस्थितियों में बदलाव के साथ अक्टूबर में प्रदूषण का स्तर बढ़ना शुरू हो सकता है।
सितंबर 2021 में दिल्ली में 27 दिन ‘संतोषजनक’ और तीन दिन ‘मध्यम’ श्रेणी की वायु गुणवत्ता रही थी तथा एक्यूआई 60 से 122 के बीच था। सितंबर का औसत एक्यूआई 2022 में 104, वर्ष 2023 में 108, वर्ष 2024 में 105 और 2025 में 105 रहा था।
हालांकि, अपेक्षाकृत साफ हवा के बीच रातें असामान्य रूप से गर्म रहीं। सितंबर में दिल्ली का औसत न्यूनतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 2020 के बाद सबसे गर्म सितंबर है। वर्ष 2020 में औसत न्यूनतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस था।
वर्ष 2021 में भी औसत न्यूनतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस रहा था, जबकि इस महीने औसत अधिकतम तापमान करीब 34.1 डिग्री सेल्सियस रहा।
निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इस साल रात के समय अधिक तापमान रहने का कारण अल नीनो का प्रभाव और कम बारिश है। सितंबर के अधिकतर हिस्से में बारिश नहीं हुई या बहुत कम छिटपुट बारिश हुई। वास्तव में 25 सितंबर तक देश में बारिश में 20 प्रतिशत की कमी थी।’’
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हुई छिटपुट बारिश से तापमान में कमी आई, लेकिन महीने के अधिकतर समय तापमान सामान्य से काफी अधिक रहा, जिससे रातें असामान्य रूप से गर्म रहीं।
इस बीच, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस साल राजधानी से अपेक्षाकृत जल्दी विदाई ले ली। मानसून दो जुलाई को दिल्ली पहुंचने के बाद 83 दिन रहने के पश्चात 23 सितंबर को वापस लौट गया। यह 14 साल में दिल्ली में मानसून का सबसे कम अवधि का ठहराव रहा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दिल्ली में मानसून 2025 में 87 दिन, 2024 में 96 दिन और 2023 में 97 दिन सक्रिय रहा था। इससे पहले 2012 में मानसून सबसे कम समय तक सक्रिय रहा था, जब यह सात जुलाई को पहुंचा और 25 सितंबर को वापस लौट गया था।
इस साल मानसून की वापसी सामान्य तारीख 25 सितंबर से दो दिन पहले हुई, जबकि इसका आगमन सामान्य तिथि 27 जून से पांच दिन बाद हुआ था।
कम अवधि के बावजूद मानसून दिल्ली में सामान्य से अधिक बारिश देकर गया। सफदरजंग केंद्र पर एक जून से 23 सितंबर के बीच 728.6 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 629.7 मिमी होती है। यह सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक है।
कम अवधि के मानसून का असर सितंबर में सूखे के रूप में नहीं दिखा। अठाईस सितंबर तक दिल्ली में चार दिन बारिश हुई और पांच सितंबर को सबसे अधिक 37.3 मिमी बारिश दर्ज की गई।
महीने के अंतिम दिनों में ठंडक का असर मंगलवार के तापमान में भी दिखाई दिया। सफदरजंग में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री कम था। वहीं पालम में अधिकतम तापमान 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 4.5 डिग्री कम था।
लोधी रोड पर अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस, रिज में 31.8 डिग्री सेल्सियस और आयानगर में 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
आईएमडी के अनुसार, सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.3 डिग्री कम और सितंबर 2008 के बाद सबसे कम था।
पालम में न्यूनतम तापमान 19.7 डिग्री सेल्सियस, लोधी रोड पर 20.4 डिग्री सेल्सियस, रिज में 16.9 डिग्री सेल्सियस और आयानगर में 20.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
‘समीर’ ऐप के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली का एक्यूआई 71 रहा और हवा की गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शून्य से 50 तक का एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।
भाषा रवि कांत सुरेश
सुरेश