दिल्ली की सीमाओं का होगा सौंदर्यीकरण, दिखेगी इतिहास और विरासत की झलक
दिल्ली की सीमाओं का होगा सौंदर्यीकरण, दिखेगी इतिहास और विरासत की झलक
(श्रुति भारद्वाज)
नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) दिल्ली आने वाले लोगों का स्वागत अब शहर के इतिहास और पहचान को दर्शाने वाले भव्य प्रवेश द्वारों से होगा। ढांसा में राजा अनंगपाल तोमर की विशाल प्रतिमा और अर्जनगढ़ में सजे हुए स्तंभ पर अशोक चक्र ऐसे प्रमुख आकर्षण होंगे, जिन्हें दिल्ली के प्रवेश बिंदुओं पर स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) ने कापसहेड़ा, अर्जनगढ़, औचंडी (खरखौदा) और ढांसा में चार प्रवेश द्वारों के निर्माण और सौंदर्यीकरण की योजना बनाई है। इन द्वारों के डिजाइन संबंधित क्षेत्रों के इतिहास और पहचान के साथ-साथ दिल्ली से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित होंगे।
एक अधिकारी ने बताया कि चारों प्रवेश द्वारों की अपनी अलग कलाकृति और स्थापत्य शैली होगी। इनमें ऐतिहासिक दिल्ली, इंद्रप्रस्थ, लोकतंत्र, यमुना, दिल्ली के उद्यान, सांस्कृतिक राजधानी, गणतंत्र, विविधता में एकता और युगों से दिल्ली जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा के गुरुग्राम से दिल्ली को जोड़ने वाले कापसहेड़ा बॉर्डर पर प्रस्तावित प्रवेश द्वार पर ‘‘वेलकम टू दिल्ली’’ लिखा होगा। इसके डिजाइन में एक पेड़ के नीचे बैठे गुरु और उनके आसपास बैठे छात्रों को दर्शाया गया है, जो शिक्षा, ज्ञान और क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ाव को दिखाता है।
अधिकारी ने बताया कि इस द्वार पर गुरु और छात्रों की आकृतियां बड़े मेहराबों के ऊपर बनाई जाएंगी। इनके आसपास सजावटी डिजाइन होंगे। दोनों ओर हरियाली और पेड़ भी लगाए जाएंगे, जिससे पारंपरिक डिजाइन, सार्वजनिक कला और हरियाली का मिश्रण दिखाई देगा।
हरियाणा के खरखौदा-सोनीपत क्षेत्र को दिल्ली से जोड़ने वाले औचंडी बॉर्डर का डिजाइन अधिक विस्तृत और विरासत आधारित होगा। अधिकारी के अनुसार, प्रवेश द्वार के स्तंभों पर दो बड़ी मानव आकृतियां बनाई जाएंगी, जबकि मुख्य द्वार के ऊपर घोड़े, रथ और अन्य आकृतियों का समूह सजावटी तत्व के रूप में होगा।
गुरुग्राम से दिल्ली को जोड़ने वाले अर्जनगढ़ बॉर्डर पर क्षेत्र के इतिहास और पहचान को कलात्मक स्तंभों के जरिए दर्शाया जाएगा। प्रस्तावित डिजाइन में कमल, विरासत शैली की जाली का काम, यमुना को दर्शाने वाले पैटर्न, पत्तियों वाला पेड़ और सबसे प्रमुख रूप से अशोक चक्र वाला स्तंभ शामिल होगा।
हरियाणा से दिल्ली को जोड़ने वाले ढांसा बॉर्डर पर दिल्ली के ऐतिहासिक अतीत की झलक दिखाई देगी। अधिकारी ने बताया कि यहां तलवार लिए राजा अनंगपाल तोमर की विशाल प्रतिमा बनाई जाएगी, जिसके चारों ओर सजावटी कलाकृतियां होंगी। इससे प्रवेश द्वार को ऐतिहासिक और शाही स्वरूप मिलेगा।
अधिकारी ने कहा कि ढांसा में राजा अनंगपाल तोमर की प्रतिमा लगाने का उद्देश्य दिल्ली के इतिहास और तोमर शासक से उसके संबंध को उजागर करना है। माना जाता है कि 11वीं शताब्दी में अनंगपाल तोमर ने दिल्ली को बसाया था और शहर के शुरुआती किलेबंद इलाकों में से एक लाल कोट की स्थापना का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
अधिकारी के अनुसार, इस परियोजना की अनुमानित लागत 39.90 करोड़ रुपये है। इसमें निर्माण पूरा होने के बाद तीन साल तक बिजली और बागवानी कार्यों का रखरखाव भी शामिल है। परियोजना में टेराकोटा, मिश्रित माध्यम, कांच मोजेक, पत्थर, स्टेनलेस स्टील और कॉर्टेन स्टील से बनी कलाकृतियां भी शामिल होंगी।
उन्होंने कहा कि चारों प्रवेश द्वार दिल्ली में आने वाले लोगों को शहर की अलग-अलग झलक दिखाने के लिए तैयार किए जा रहे हैं। कापसहेड़ा में गुरु और शिष्यों से लेकर औचंडी में विरासत आकृतियां, अर्जनगढ़ में प्रतीकात्मक स्तंभ और ढांसा में राजा अनंगपाल तोमर की प्रतिमा से राजधानी के चार अलग-अलग कलात्मक स्वागत द्वार सजे होंगे।
भाषा मनीषा वैभव
वैभव

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