नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को भाजपा सदस्य के. लक्ष्मण ने ईपीएस पेंशनभोगियों के लिए न्यूनतम पेंशन बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने पर विचार करने की सरकार से मांग की।
राज्यसभा में विशेष उल्लेख के जरिए इस मुद्दे को उठाते हुए लक्ष्मण ने रेखांकित किया कि वैधानिक न्यूनतम पेंशन अब भी 1,000 रुपये बनी हुई है, जबकि पिछले कुछ वर्षों में भोजन, दवाओं और स्वास्थ्य सेवा की लागत में काफी वृद्धि हुई है।
देश भर के लाखों सेवानिवृत्त श्रमिकों के मुद्दे की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘कर्मचारी पेंशन योजना लगभग तीन दशक से संगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सेवानिवृत्ति सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रही है। इसने न केवल सेवानिवृत्ति प्राप्त कर्मचारियों को, बल्कि विधवाओं और आश्रित सदस्यों को भी सहायता सुनिश्चित की है।’’
उन्होंने कहा कि श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि किसी उचित तंत्र के माध्यम से मुद्रास्फीति से जोड़कर न्यूनतम पेंशन बढ़ाई जा सकती है। लक्ष्मण ने सुझाव दिया कि पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी के लिए किफायती स्वास्थ्य सेवा सहायता पर भी विचार किया जा सकता है।
भाजपा सदस्य ने कहा कि इस तरह के कदम से उन वरिष्ठ नागरिकों को, जिन्होंने देश के विकास में योगदान दिया है, सम्मान और वित्तीय सुरक्षा के साथ सेवानिवृत्ति के बाद जीने में मदद मिलेगी।
विशेष उल्लेख के जरिए ही, मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने मातृ मानसिक स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने मातृ मानसिक स्वास्थ्य की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य सेवा का एक आवश्यक लेकिन अक्सर उपेक्षित पहलू है। उन्होंने अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में लगभग हर 5 में से 1 नयी मां प्रसव के बाद अवसाद से ग्रसित हो जाती हैं।
मूर्ति ने सरकार से मातृ मानसिक स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रीय नीति बनाने का आग्रह किया।
विशेष उल्लेख के जरिए ही भाजपा सदस्य स्वाति मालीवाल ने बच्चों और स्कूली छात्रों के बीच ई-सिगरेट (वेप) के बढ़ते चलन पर चिंता जतायी। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ वेप में बीस सिगरेट के बराबर निकोटिन होता है, लेकिन इसमें न धुआं दिखता है, न बदबू आती है, इसलिए मां-बाप को पता ही नहीं चलता, लेकिन हकीकत में बच्चों को निकोटिन की लत में धकेला जा रहा होता है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार ने 2019 में कानून लाकर ई-सिगरेट पर पूरी तरह रोक लगाई थी। लेकिन इसकी अवैध रूप से अब भी बिक्री हो रही है। उन्होंने कहा कि निकोटिन बच्चों के मस्तिष्क को स्थायी तौर पर प्रभावित करता है, जिससे उनका जिंदगी भर निकोटिन और सिगरेट की लत में फंसने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
मालीवाल ने सरकार से मांग की कि राज्यों के साथ मिलकर वेप की अवैध बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जाए, शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाए जाएं और अभिभावकों को भी जागरूक किया जाए ताकि वे अपने बच्चों को नशे की गिरफ्त में आने से बचा सकें।
कई अन्य सदस्यों ने भी विशेष उल्लेख के जरिए लोक महत्व से जुड़े अपने मुद्दे उठाए।
भाषा अविनाश सुभाष
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