राज्यसभा में उठी राज्यों के लिए केंद्रीय अनुदान में कटौती नहीं करने की मांग

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राज्यसभा में उठी राज्यों के लिए केंद्रीय अनुदान में कटौती नहीं करने की मांग

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 04:13 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 04:13 PM IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) राज्यसभा में बृहस्पतिवार को विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक, 2026 पर चर्चा में हिस्सा लेने वाले अधिकतर सदस्यों ने अपने-अपने राज्यों की लंबित परियोजनाओं को यथाशीघ्र पूरा किए जाने तथा राज्यों के लिए केंद्रीय अनुदान की राशि में कटौती नहीं करने की मांग की।

उच्च सदन की कार्यवाही तीन बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बज कर 45 मिनट पर शुरू होने पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक को चर्चा और लोकसभा को लौटाने के लिए पेश किया।

विधेयक का उद्देश्य भारत की संचित निधि से उन खर्चों के लिए पैसे निकालने की मंजूरी देना है, जो व्यय 31 मार्च 2023 को खत्म हुए वित्त वर्ष के दौरान कुछ खास सेवाओं पर, मंजूर की गई रकम से अधिक किए गए थे।

चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के बाबुल सुप्रियो ने कहा कि वित्त मंत्री अनुदान की जो मांगें लेकर सदन में आयी हैं, यह कोई असंवैधानिक बात नहीं है, जिसका वह विरोध करें।

सुप्रियो ने सवाल उठाया कि सरकार उस खर्च के लिए 2026 में संसद में क्यों आयी है जो 2022-23 में किया गया? उन्होंने कहा कि सरकार करोड़ों रूपये खर्च करती है तथा 54 करोड़ रूपये कोई बड़ी बात नहीं है।

तृणमूल सांसद ने कहा कि अनुदान की अनुपूरक मांगें सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा गृह मंत्री को सदन में आना चाहिए।

तृणमूल सदस्य बाबुल सुप्रियो के दावे का प्रतिवाद करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि उनका मकसद विनियोग विधेयक पर बोलना नहीं है तथा उन्होंने जो आंकड़े दिये हैं, वे गलत हैं।

सीतारमण ने कहा कि 54 करोड़ रूपये कहना गलत है। उन्होंने कहा कि 196 करोड़ रूपये तथा एक अन्य मद में 53 करोड़ रूपये की मंजूरी मांगी गयी है।

वित्त मंत्री ने प्रश्न किया कि इससे पहले वह (मौजूदा वित्त वर्ष में) कितनी बार अतिरिक्त बजट की अनुमति लेने के लिए संसद के पास आयी हैं?

उन्होंने कहा कि सरकार लोक लेखा समिति (पीएसी) की सिफारिश पर इसकी अनुमति लेने के लिए संसद में आयी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि उनकी इच्छा रहती है कि सदस्य तथ्यों पर बात करें ताकि वह उनका जवाब दे सकें।

राकांपा के राजेंद्र हीरालाल जैन ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह विधेयक वित्तीय जवाबदेही को मजबूत करता है। उन्होंने जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों की मदद किए जाने की मांग की।

बीजद की सुलता देव ने राज्यों को दिए जाने वाले केंद्रीय अनुदान में कटौती का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे विकास कार्य बाधित होते हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा को दिए जाने वाले केंद्रीय अनुदान में बहुत कमी आई है।

बीआरएस के रविचंद्र वद्दिराजू ने कहा कि तेलंगाना की लंबित परियोजनाओं को पूरा करना चाहिए।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के गोल्लाबाबू राव ने आंध्र प्रदेश के गठन के समय किए गए वादे पूरा करने की मांग की।

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि शिक्षा एवं रोजगार पर अधिक राशि खर्च की जानी चाहिए।

राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने कहा कि ऑनलाइन मंचों की वजह से छोटे दुकानदारों को हो रहे नुकसान को देखते हुए इस समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए।

अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरै, तेदेपा के भाष्यम रामकृष्ण, भाजपा के सिकंदर कुमार, महेंद्र भट्ट, अनिल सुखदेवराव बोंडे, नेशनल कॉन्फ्रेन्स के चौधरी मोहम्मद रमजान, यूपीपी (एल) के प्रमोद बोरो, डीएमडीके सदस्य एल के सुधीश और मनोनीत सतनाम सिंह संधू ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।

भाषा

मनीषा अविनाश

अविनाश