नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने मंगलवार को कहा कि कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने का आदेश ‘ खंडित न्यायिक व्यवस्था’ को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जिसे पसंद नहीं करती है उन्हें जेल में डालने के लिए यूएपीए और पीएमएलए जैसे कानूनों का इस्तेमाल करती है।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने कहा कि उमर और शरजील जैसे मामलों में जहां सुनवाई शुरू भी नहीं हुई है, वहां दोषी होने का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
गोखले ने कहा, ‘‘उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने का आदेश न्यायिक व्यवस्था की खामियों को दर्शाता है। मोदी सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) जैसे कानूनों का इस्तेमाल अपने विरोधियों को जेल में डालने के लिए नियमित रूप से किया है।’’
उन्होंने कहा कि न्याय देने की शक्ति न्यायपालिका के पास है और हाल के दिनों में उच्चतम न्यायालय की पीठों ने ‘स्वतंत्रता के सिद्धांतों को बरकरार रखा है, जहां न्यायमूर्ति ओका और मसीह की पीठ ने फैसला सुनाया कि यूएपीए मामलों में भी जमानत एक सामान्य प्रक्रिया होनी चाहिए’।
उन्होंने कहा, ‘‘कई पीठ ने अपनी शक्तियों के दायरे में रहते हुए पीएमएलए के कठोर प्रावधानों को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश भी की है।’’
गोखले ने कहा कि खालिद और इमाम को कम से कम एक और साल जेल में ही रहना पड़ेगा, जबकि उनके खिलाफ अभी तक सुनवाई भी शुरू नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘वहीं दूसरी ओर दिल्ली दंगों के दौरान खुलेआम भीड़ को उकसाते नजर आने वाले भाजपा के कपिल मिश्रा अब मंत्री हैं। उन्हें कभी न्याय का सामना नहीं करना पड़ा।’’
भाषा यासिर नरेश
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