धीरपुर परिसर आंबेडकर विवि को भविष्य के लिए तैयार संस्थान में बदल देगा : कुलपति

धीरपुर परिसर आंबेडकर विवि को भविष्य के लिए तैयार संस्थान में बदल देगा : कुलपति

धीरपुर परिसर आंबेडकर विवि को भविष्य के लिए तैयार संस्थान में बदल देगा : कुलपति
Modified Date: June 30, 2026 / 06:06 pm IST
Published Date: June 30, 2026 6:06 pm IST

(अहेली दास)

नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) दिल्ली के डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय का धीरपुर में बनने वाला नया परिसर छात्रों को ध्यान में रखते हुए सीखने का आधुनिक माहौल देगा और लंबे समय से चली आ रही जगह की कमी को दूर करने में मदद करेगा। यह बात विश्वविद्यालय की कुलपति अनु सिंह लाठर ने यहां कही।

लाठर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार से हाल में मंजूर हुई 1,668 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना पर कई सालों से काम चल रहा था, लेकिन नयी सरकार की मंजूरी के बाद अब इसमें तेजी आई है।

उन्होंने कहा, “धीरपुर परिसर के लिए पहले का अनुमान लगभग 1,199 करोड़ रुपये था।” उन्होंने बताया कि कई बातों को ध्यान में रखते हुए जब लोक निर्माण विभाग ने अनुमानों में बदलाव किया, तो मंजूर की गयी परियोजना की कुल लागत का अनुमान काफी बढ़ गया।

उन्होंने कहा कि विवि ने अपने प्रस्तावित धीरपुर और रोहिणी, दोनों परिसर के लिए वास्तुशिल्प डिजाइन को पहले ही अंतिम रूप दे दिया है, हालांकि निर्माण कार्य सबसे पहले धीरपुर में शुरू होगा।

उन्होंने कहा, “सरकार फैसले लेने में बहुत तेजी दिखा रही है। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री बहुत उत्सुक थे कि यह परियोजना आखिरकार हकीकत का रूप ले।”

लाठर ने कहा कि नए परिसर को नयी शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत सोची गई ‘‘मिलकर सीखने और छात्र पर केंद्रित सीखने की सोच’’ के आधार पर डिजाइन किया जाएगा।

कुलपति ने कहा, “इसमें आधुनिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी से युक्त सीखने-सिखाने की जगह, मिलकर काम करने की जगह, खुली चर्चा के क्षेत्र और सह-शिक्षण स्थान होंगे, जहां छात्र मिल सकें, विचार-विमर्श कर सकें और नई चीजें बना सकें। हमारा मानना ​​है कि उच्च शिक्षा को छात्र-केंद्रित होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि एनईपी के कई प्रावधानों को लागू करने वाले शुरुआती संस्थानों में से एक होने के बावजूद, जगह की कमी के कारण विश्वविद्यालय का विस्तार सीमित रहा।

उन्होंने कहा, “हमारे मौजूदा परिसर में जगह कम थी। नई जमीन मिलने से अब हमें बेहतर अवसंरचना के साथ एक भविष्य-उन्मुख विश्वविद्यालय बनाने का मौका मिला है।”

काम पूरा करने की हालांकि कोई औपचारिक समय-सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन लाठर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि निर्माण कार्य लगभग तीन वर्षों में पूरा हो जाएगा, बशर्ते पीडब्ल्यूडी द्वारा समय-सीमा को अंतिम रूप दे दिया जाए।

कुलपति ने कहा कि पिछले कुछ सालों में विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या काफी बढ़ गई है, इसलिए अवसंरचना का विस्तार करना जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा, “2019 में, विवि के तीन परिसर में कुल मिलाकर लगभग 2,400 छात्र थे। आज हमारे चार परिसरों में लगभग 6,300 छात्र हैं, और एक साल के स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू होने और पीएचडी में दाखिले बढ़ने की वजह से, उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक यह संख्या लगभग 7,000 तक पहुंच जाएगी।”

अकादमिक सुधारों पर लाठर ने कहा कि विवि ने इस अकादमिक सत्र में प्रयोग के तौर पर सात विषयों में एक साल के स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किए हैं।

उन्होंने कहा कि एक साल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिला सभी विश्वविद्यालयों के उन स्नातकों के लिए खुला है जिन्होंने चार साल का स्नातक प्रोग्राम पूरा किया था और ये सिर्फ आंबेडकर विवि के छात्रों तक सीमित नहीं है।

भाषा प्रशांत माधव

माधव


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