पश्चिम एशिया में संवाद से हो समाधान, अपने नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित प्राथमिकता: जयशंकर

पश्चिम एशिया में संवाद से हो समाधान, अपने नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित प्राथमिकता: जयशंकर

पश्चिम एशिया में संवाद से हो समाधान, अपने नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित प्राथमिकता: जयशंकर
Modified Date: March 9, 2026 / 04:43 pm IST
Published Date: March 9, 2026 4:43 pm IST

नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति की जरूरत पर जोर देते हुए सोमवार को लोकसभा में कहा कि उस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा तथा अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अमेरिका और इजराइल ने बीते 28 फरवरी को ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया था जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे।

अधिकारियों के अनुसार, युद्ध में अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोग, लेबनान में 397 और इज़राइल में 11 लोग मारे गए हैं।

संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया संघर्ष पर दिए अपने वक्तव्य में जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार पश्चिम एशियाई क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के पक्ष में है। उन्होंने एक ईरानी जहाज को भारतीय बंदरगाह पर खड़ा करने की अनुमति देने को मानवीय आधार पर लिया गया सही निर्णय बताया।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस क्षेत्र के हालात पर नजर रख रही है और संघर्ष क्षेत्र में फंसे 67,000 भारतीय नागरिकों को पहले ही वापस लाया जा चुका है।

जयशंकर ने कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा तथा व्यापार जैसे राष्ट्रीय हित सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।

उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में दिए वक्तव्य में कहा, ‘‘भारत शांति के पक्ष में है और बातचीत और कूटनीति का मार्ग अपनाने का आग्रह करता है। हम तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पैरोकारी करते हैं।’’

उनका कहना था, ‘‘क्षेत्र में भारतीय समुदाय का कल्याण और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार सहित हमारे राष्ट्रीय हित हमेशा सर्वोपरि रहेंगे।’’

दोनों सदनों में, जब जयशंकर वक्तव्य देने के लिए उठे तो विपक्ष ने जोरदार नारेबाजी की और मांग की कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर उनके वक्तव्य से पहले चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष ने राज्यसभा से इस मुद्दे पर वॉकआउट किया, तो लोकसभा में हंगामा किया गया जिससे निचने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार ने 28 फरवरी को एक बयान जारी कर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘हम मानते थे और मानते रहेंगे कि तनाव कम करने और अंतर्निहित मुद्दों पर ध्यान देने के लिए बातचीत और कूटनीति अपनाई जानी चाहिए। यह भी जरूरी है कि क्षेत्र के सभी राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए।’’

जयशंकर ने कहा कि क्षेत्र के घटनाक्रम ‘‘हम सभी’’ के लिए गहरी चिंता का कारण हैं और संघर्ष लगातार तेज हो गया है जिससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति काफी खराब हो गई है।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से बात की है और उन्हें आश्वासन मिला है कि भारतीय समुदाय की सुरक्षा उनके लिए प्राथमिकता होगी।

जयशंकर ने कहा, ‘‘मैं इसी तरह इन देशों में अपने समकक्षों के साथ निकट संपर्क में हूं। जहां तक अमेरिका का सवाल है, हमने राजनयिक चैनलों के माध्यम से नियमित संपर्क बनाए रखा है। प्रयास किए गए हैं, लेकिन इस समय नेतृत्व स्तर पर ईरान के साथ संपर्क स्पष्ट रूप से मुश्किल है। हालांकि, मैंने 28 फरवरी और 5 मार्च, 2026 को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात की है। हम आने वाले दिनों में इन उच्च स्तरीय बातचीत को जारी रखेंगे।’’

उन्होंने संसद को भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी और प्रभावित लोगों को वापस लाने के लिए कई एयरलाइन द्वारा उड़ानों के संचालन का विवरण प्रदान किया।

वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच ऊर्जा के मोर्चे पर चिंताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ऊर्जा बाजारों की लागत और जोखिमों को ध्यान में रखते हुए इस पर पूरी तरह ध्यान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

जयशंकर ने कहा, ‘‘भारतीय उपभोक्ताओं का हित हमारे लिए हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है और आगे भी रहेगा। जहां आवश्यक हुआ है, वहां इस अस्थिर स्थिति में भारतीय कूटनीति ने हमारी ऊर्जा कंपनियों के प्रयासों का समर्थन किया है।”

वर्तमान में कोच्चि में खड़े ईरानी जहाज को लेकर मंत्री ने कहा कि ईरानी पक्ष ने 28 फरवरी को क्षेत्र में तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर खड़ा करने की अनुमति का अनुरोध किया था और एक मार्च को अनुमति दे दी गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘आइरिस लवन (जहाज) वास्तव में चार मार्च को कोच्चि में खड़ा किया गया था। चालक दल वर्तमान में भारतीय नौसैनिक केंद्र में है। हमारा मानना ​​​​है कि यह सही दिशा में किया गया कार्य था और ईरानी विदेश मंत्री ने इस मानवीय अभिव्यक्ति के लिए हमारे देश का धन्यवाद व्यक्त किया है।’’

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में रहने और काम करने वाले लाखों भारतीय नागरिकों और अध्ययन या रोजगार के लिए ईरान में कुछ हज़ार भारतीय नागरिकों की मौजूदगी को देखते हुए, क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

जयशंकर ने संसद को यह भी बताया कि उनका मंत्रालय और पश्चिम एशियाई देशों में भारतीय दूतावास, वहां भारतीय नागरिकों को नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं, उन्हें ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए कह रहे हैं और जो पहले से ही वहां मौजूद हैं उन्हें भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दे रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने स्थिति की निगरानी करने और भारतीय नागरिकों के अनुरोधों का जवाब देने के लिए एक विशेष नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है, जबकि पोत परिवहन महानिदेशालय ने एक त्वरित मोचन दल का गठन किया है।

भाषा हक

हक वैभव

वैभव


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