नहीं पता था कि मेरा बेटा रूस से जिंदा नहीं लौटेगा: राकेश कुमार

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नहीं पता था कि मेरा बेटा रूस से जिंदा नहीं लौटेगा: राकेश कुमार

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  • Publish Date - April 15, 2026 / 06:00 PM IST,
    Updated On - April 15, 2026 / 06:00 PM IST

चंडीगढ़, 15 अप्रैल (भाषा) बेहतर भविष्य और बड़े सपनों के साथ अपने बेटे को रूस भेजने वाले राकेश कुमार को उस समय रत्ती भर भी आभास नहीं था कि वह अपने बेटे को इसके बाद कभी जिंदा नहीं देख पाएंगे।

राकेश कुमार की पथराई आंखें अब अपने बेटे के ताबूत के इंतजार में हैं।

अंशु (25) हरियाणा के रेवाड़ी के एक गांव से अध्ययन वीजा पर रूस गया था लेकिन सेना में कथित तौर पर शामिल किये जाने के बाद वह रूस-यूक्रेन संघर्ष में मारा गया।

शोक संतप्त कुमार अब अपने बेटे के शव को स्वदेश लाये जाने का इंतजार कर रहे हैं।

अंशु का मामला अकेला नहीं है, क्योंकि हरियाणा के तीन और युवकों के शव हाल में भारत को लौटाए गए हैं।

कुमार चंडीगढ़ परिवहन उपक्रम में कार्यरत हैं और वर्तमान में चंडीगढ़ में तैनात हैं।

कुमार ने कहा कि अंशु 20 अप्रैल, 2025 को अध्ययन वीजा पर रूस के लिए रवाना हुआ था, लेकिन शुरू में सैन्य प्रशिक्षण के लिए भेजे जाने के बाद उसे रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया।

उन्होंने बताया कि अंशु को पढ़ाई के लिए रूस भेजने में परिवार ने लगभग छह लाख रुपये खर्च किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अंशु और अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद में रूस गये हरियाणा के कई अन्य युवाओं को स्थानीय एजेंटों द्वारा आकर्षक नौकरियों का वादा किया गया था।

कुमार ने कहा कि हालांकि, बाद में इन युवाओं को पता चला कि उन्हें ‘‘धोखे से’’ रूस-यूक्रेन संघर्ष में धकेला गया था।

उन्होंने बताया कि अंशु सोनीपत स्थित एक ट्रैवल एजेंट के माध्यम से रूस गया था। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे चार अप्रैल को रूसी सेना में सेवा दे चुके एक पूर्व सैनिक का फोन आया, जिसने मुझे बताया कि मेरे बेटे की मौत हो गई है। उन्होंने कहा कि शव अभी तक मॉस्को नहीं लाया गया है और इसे भारत लाये जाने में 10-15 दिन लगेंगे।’’

पिछले साल नवंबर में परिवार का उससे संपर्क टूट गया था और उन्हें हाल में उसकी मौत की सूचना मिली।

कुमार ने हरियाणा के उन अभिभावकों के साथ, जिनके बच्चे इसी तरह रूस-यूक्रेन संघर्ष में फंसे हुए हैं, पिछले साल नवंबर और दिसंबर में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था।

उन्होंने बताया कि रोहतक के सामाजिक कार्यकर्ता जय भगवान इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों की सहायता और समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

ग्राम विकास समिति नामक संगठन के प्रमुख जय भगवान ने बताया कि तीन नवंबर और एक दिसंबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान भारतीय युवाओं के परिवारों ने अपने बेटों की सुरक्षित वापसी की मांग की थी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न केवल हरियाणा के युवा बल्कि पंजाब और अन्य क्षेत्रों के युवाओं को भी इसी तरह संघर्ष में धकेला गया है।

हाल के हफ्तों में हरियाणा के तीन अन्य युवकों के शव रूस से वापस लाए गए हैं। ये युवक करनाल, फतेहाबाद और सोनीपत के गांवों के रहने वाले थे।

करनाल जिले के चौरा गांव निवासी अनुज शर्मा (23) ने भी पिछले साल रूस की यात्रा की थी। उसके भाई अर्जुन शर्मा ने बुधवार को कहा, ‘‘मेरा भाई 21 मई, 2025 को करनाल के एक ट्रैवल एजेंट के माध्यम से भाषा पाठ्यक्रम के लिए अध्ययन वीजा पर रूस गया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘रूस में, कुछ स्थानीय एजेंटों ने उसे और अन्य युवाओं को आकर्षक नौकरियों का वादा किया। हालांकि, बाद में उन्हें बताया गया कि उन्हें केवल बंकर खोदने का काम ही करना होगा। बाद में हमें पता चला कि उसे जबरन रूसी सेना में भर्ती कराया गया और लड़ाई में लड़ने के लिए मजबूर किया गया। अनुज से 13 अक्टूबर, 2025 को हमारा संपर्क टूट गया और 20 अक्टूबर को हमें पता चला कि उसे गोली लगी है। उसका शव 26 मार्च को वापस लाया गया और हमने अपने गांव में उसका अंतिम संस्कार किया।’’

इसी महीने की शुरुआत में, फतेहाबाद जिले के कुम्हरिया गांव के रहने वाले अंकित जांगड़ा (24) का शव भारत लाया गया था।

अंकित के भाई रघुवीर ने सितंबर 2025 में पत्रकारों को बताया था कि अंकित ने वीडियो कॉल के दौरान अपनी स्थिति के बारे में जानकारी साझा की थी। अंकित छह महीने पहले रूसी भाषा के पाठ्यक्रम के लिए छात्र वीजा पर मॉस्को गया था।

हरियाणा के सोनीपत जिले के इब्राहिम पुर कुराड़ गांव के निवासी अंकित (30) का शव रूस-यूक्रेन संघर्ष में मारे जाने के बाद इसी महीने वापस लाया गया। वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और लगभग एक साल पहले अध्ययन वीजा पर रूस गया था।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश