सबूतों से छेड़छाड़ का एंटनी राजू का इरादा साबित करना मुश्किल : केरल उच्च न्यायालय

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सबूतों से छेड़छाड़ का एंटनी राजू का इरादा साबित करना मुश्किल : केरल उच्च न्यायालय

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 03:21 PM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 03:21 PM IST

कोच्चि, छह मार्च (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि यह साबित करना मुश्किल होगा कि 1990 के मादक पदार्थ के एक मामले में जब राज्य के पूर्व परिवहन मंत्री एंटनी राजू एक जूनियर वकील थे, तब उनकी सबूतों से छेड़छाड़ करने की मंशा थी।

न्यायमूर्ति सी. जयचंद्रन ने यह भी पूछा कि क्या राजू के वरिष्ठ वकील को सबूतों से छेड़छाड़ की जानकारी थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि राजू के ऊपर आपराधिक जिम्मेदारी कैसे तय की जा सकती है। यह जानकारी एक वरिष्ठ सरकारी वकील ने दी।

अदालत ने यह भी पूछा कि राजू के ऊपर सबूतों से छेड़छाड़ करने की मंशा का आरोप कैसे लगाया जा सकता है।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जब सबूत राजू की अभिरक्षा में थे, उसी दौरान उनके साथ छेड़छाड़ की गई थी।

उच्च न्यायालय की ये टिप्पणियां और सवाल उस समय आए जब अदालत राजू की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने का अनुरोध किया है, ताकि वह आगामी विधानसभा चुनाव लड़ सकें।

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने कहा कि पूर्व मंत्री ‘‘यह साबित करने में विफल रहे हैं कि यदि उनकी सजा लागू रहती है तो उन्हें कोई गंभीर अन्याय या अपूरणीय क्षति होगी।’’

सरकार ने यह भी कहा कि उन्हें राहत देना चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को कमजोर करेगा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने राजू की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। राजू जनाधिपत्य केरल कांग्रेस के नेता हैं, जो केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले एलडीएफ गठबंधन का हिस्सा है।

राजू ने उच्च न्यायालय का रुख तब किया जब तिरुवनंतपुरम जिला एवं सत्र न्यायालय ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

नेडुमंगड की प्रथम श्रेणी की न्यायिक मजिस्टेट अदालत ने उन्हें तीन साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला 1990 में मादक पदार्थ के मामले में गिरफ्तार किए गए एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक के वकील के रूप में पेश होते समय सबूतों से छेड़छाड़ से संबंधित था।

सजा सुनाए जाने के बाद केरल विधानसभा सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी कर उनकी अयोग्यता की पुष्टि कर दी।

उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में राजू ने कहा कि सजा पर रोक लगाने का अनुरोध इसलिए किया गया है क्योंकि केरल विधानसभा के वर्तमान सदस्य होने के बावजूद वह केवल इस सजा के कारण पद धारण करने के लिए अयोग्य हो गए हैं।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि और सजा कानून, तथ्यों और साक्ष्यों के विपरीत है और अदालत ने साक्ष्यों का मूल्यांकन करते समय गंभीर त्रुटियां की हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है, ‘‘निचली अदालत द्वारा दी गई सजा अत्यधिक है और इसमें 35 वर्षों की देरी को ध्यान में नहीं रखा गया। यह सजा केवल याचिकाकर्ता को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अयोग्य ठहराने के उद्देश्य से दी गई है।’’

भाषा गोला नरेश

नरेश