नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिव्यांगता पेंशन न तो कोई इनाम है और न ही राज्य की कृपा पर निर्भर कोई अनुग्रह राशि है, तथा सरकार अपने दृष्टिकोण में चयनात्मक या असमान नहीं हो सकती है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने पूर्व सैनिकों को दिव्यांगता पेंशन के भुगतान संबंधी सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए ये टिप्पणियां कीं।
न्यायालय ने कहा कि दिव्यांगता पेंशन कोई दान-पुण्य का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्र की सेवा में किए गए बलिदान की मान्यता है।
पीठ ने कहा, “इस न्यायालय द्वारा विधिवत स्थापित सिद्धांत के अनुसार पेंशन न तो कोई अनुग्रह राशि है और न ही राज्य की कृपा पर निर्भर अनुग्रह भुगतान। यह पूर्व में दी गई सेवाओं का विलंबित हिस्सा है और निर्धारित शर्तों की पूर्ति होने पर यह एक निहित एवं विधिसम्मत रूप से प्रवर्तनीय अधिकार के रूप में परिवर्तित हो जाती है।”
इसने कहा, “इसलिए, पेंशन संबंधी अधिकार संपत्ति के समान होते हैं, और इन्हें कानून के अधिकार के अलावा रोका, कम या समाप्त नहीं किया जा सकता।”
भाषा प्रशांत नेत्रपाल
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