दिव्यांग अधिकार समूहों ने प्रस्तावित जनगणना 2027 की ‘खामियों’ को उजागर किया
दिव्यांग अधिकार समूहों ने प्रस्तावित जनगणना 2027 की ‘खामियों’ को उजागर किया
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) दिव्यांगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने 2027 की जनगणना में दिव्यांगों की गिनती के प्रस्तावित तरीके पर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि फार्म में दी गई नौ श्रेणियां, ‘दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडी)- 2016’ के तहत मान्यता प्राप्त सभी 21 तरह की दिव्यांगताओं को शामिल नहीं करती हैं।
नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर द राइट्स ऑफ द डिसेबल्ड (एनपीआरडी) की ओर से जारी और 405 लोगों के समर्थन वाले एक बयान में कहा गया है कि प्रस्तावित वर्गीकरण के कारण कई समूह दिव्यांगता के आधिकारिक आंकड़ों में खुद को शामिल कराने से वंचित हो सकते हैं।
बयान के अनुसार, प्रस्तावित जनगणना ढांचे में दृष्टिबाधित, मूकबधिर, चलना-फिरना, बौद्धिक अक्षमता, मानसिक बीमारी, तेजाब हमला, पुरानी तंत्रिकातंत्र संबंधी और रक्त संबंधी विकार सहित नौ श्रेणियां शामिल की गई हैं।
इन समूहों ने कहा कि ‘मंदबुद्धि’ के बजाय ‘बौद्धिक अक्षमता’ शब्द का इस्तेमाल करने के अलावा, पहली छह श्रेणियां 2011 की गिनती का भी हिस्सा थीं। उन्होंने कहा कि तेजाब हमला, पुरानी तंत्रिकातंत्र संबंधी बीमारियां और रक्त से जुड़ी बीमारियों को अतिरिक्त श्रेणियों के तौर पर शामिल करने का प्रस्ताव है।
बयान में कहा गया लेकिन आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 21 तरह की दिव्यांगताओं को मान्यता देता है।
संगठनों ने कहा कि प्रस्तावित श्रेणियों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, सीखने से जुड़ी खास अक्षमताएं, बौनापन, कुष्ठ रोग से ठीक हुए लोग और कई तरह की अक्षमताएं (जिनमें सुनने में अक्षम और दृष्टिबाधित की संयुक्त स्थिति भी शामिल है) आदि के लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
इन समूहों ने चेतावनी दी कि इस तरह के वर्गीकरण से न केवल जनगणना की सटीकता पर, बल्कि बाद की सरकारी योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
बयान में कहा गया है, ‘‘इससे न केवल आंकड़े एकत्र करने वाले उलझन में पड़ जाएंगे, बल्कि गलत आंकड़े भी मिलेंगे और सरकारी आंकड़ों में दिव्यांग लोगों के पूरे समूह का प्रतिनिधित्व नहीं होगा।’’
समूहों ने कहा कि इसका असर नीति-निर्माण, कार्यक्रम की रूपरेखा, बजट आवंटन और जवाबदेही पर भी पड़ेगा।
इन समूहों ने केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के उस आश्वासन का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि सभी 21 तरह की दिव्यांगताओं के आंकड़े एकत्र किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि नौ श्रेणियों वाला जो ढांचा प्रस्तुत किया गया है, वह उस आश्वासन के विपरीत है।
संगठनों ने मांग की है कि 2027 की जनगणना की दिव्यांगता प्रश्नावली में आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त सभी 21 तरह की अशक्तताओं को अलग-अलग शामिल किया जाए।
बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में दिव्यांग अधिकार के लिए काम करने वाले लोग, अनुसंधानकर्ता और कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जैसे कि डिसएबिलिटी राइट्स अलायंस, सेंस इंटरनेशनल इंडिया, एक्शन फॉर ऑटिज्म, श्रुति डिसएबिलिटी राइट्स सेंटर, डिसएबिलिटी राइट्स एसोसिएशन ऑफ गोवा और नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड।
भाषा
धीरज अविनाश
अविनाश

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