द्रमुक ने कहा, टीवीके के कृषि बजट में ”कुछ नहीं”; कावेरी मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

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द्रमुक ने कहा, टीवीके के कृषि बजट में ''कुछ नहीं''; कावेरी मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 04:10 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 04:10 PM IST

चेन्नई, छह अगस्त (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने टीवीके सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए बृहस्पतिवार को कृषि बजट को ‘पूरी तरह से खोखला’ करार दिया और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर किसानों को ‘धोखा देने’ तथा प्रमुख चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

उन्होंने कावेरी जल विवाद पर सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाने को लेकर भी सरकार की आलोचना की।

द्रमुक की युवा इकाई के नेता की अगुवाई में विपक्षी दल के विधायक काली कमीज पहनकर तमिलनाडु विधानसभा पहुंचे। राज्य सरकार द्वारा कृषि ऋण माफी और मेकेदातु बांध संकट के मामले में कथित तौर पर कोई कदम न उठाए जाने के विरोध में विपक्षी विधायक काली कमीज पहनकर आए ।

सरकार ने बृहस्पतिवार को अपना पहला कृषि बजट पेश किया।

विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए उदयनिधि ने कृषि समुदाय के समक्ष मुख्य मुद्दों का समाधान करने में विफल रहने और मौजूदा योजनाओं को ‘केवल नया रूप देने’ को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

कृषि बजट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, इसमें ‘कुछ नहीं’ है।

उन्होंने कहा, ‘हम लगातार कावेरी और मेकेदातु मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं। हमें यह दिखाना चाहिए कि तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं। लेकिन हमेशा की तरह मुख्यमंत्री चुप हैं और कोई जवाब नहीं दे रहे हैं।’

उदयनिधि ने सरकार पर चुनावी वादे पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पांच एकड़ तक भूमि रखने वाले किसानों के सभी फसल ऋण माफ करने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार उसे पूरा करने में विफल रही है।

उदयनिधि ने बताया कि हालांकि शुरुआत में माफी की सीमा 50,000 रुपये तय की गई थी और बाद में किसानों की मांग पर इसे बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया, किसान शुरू में किए गए वादे के मुताबिक पूरी माफी की मांग कर रहे हैं।

अंतरराज्यीय जल विवाद का उल्लेख करते हुए उदयनिधि ने दावा किया कि कर्नाटक ने तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी जल छोड़ने से एकतरफा इनकार कर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने इस मामले पर बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया, जिससे तमिलनाडु के किसान मंझधार में फंस गए।

भाषा

शुभम पवनेश

पवनेश