केवल किताबों तक सीमित न रहें, अपने आस-पास के माहौल से सीखें : राष्ट्रपति मुर्मू की छात्रों से अपील

केवल किताबों तक सीमित न रहें, अपने आस-पास के माहौल से सीखें : राष्ट्रपति मुर्मू की छात्रों से अपील

केवल किताबों तक सीमित न रहें, अपने आस-पास के माहौल से सीखें : राष्ट्रपति मुर्मू की छात्रों से अपील
Modified Date: June 30, 2026 / 09:01 pm IST
Published Date: June 30, 2026 9:01 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

विशाखापत्तनम, 30 जून (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को छात्रों का आह्वान किया कि वे तेजी से बदलती दुनिया में प्रासंगिक बने रहने के लिए कौशल विकास के उभरते क्षेत्रों के साथ कदम मिलाकर चलें।

राष्ट्रपति मुर्मू ने आंध्र प्रदेश केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों से कहा कि वे केवल किताबों से मिली जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए अपने आस-पास के परिवेश से भी सीखें।

उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने समुदाय, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहते हुए समाज और देश के भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने तेजी से विकसित हो रहे भारत का संदर्भ देते हुए कहा कि देश की विरासत से जुड़े रहने के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय उत्तरी आंध्र प्रदेश के आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए ‘ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र’का संचालन कर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय ने आदिवासी कल्याण, जन स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और पोषण सुरक्षा और ऊर्जा संरक्षण जैसे क्षेत्रों में शैक्षणिक और ज़मीनी स्तर के कामों पर ध्यान केंद्रित किया है।

उन्होंने भरोसा जताया कि ये कोशिशें एक समावेशी और विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

राष्ट्राध्यक्ष ने ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना का हवाला देते हुए विश्वास जताया कि आंध्र प्रदेश केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित अपनी समावेशी और व्यावहारिक शिक्षण पद्धति के माध्यम से इस उद्देश्य को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि जनजातीय समुदायों के सदस्यों को आधुनिक शिक्षा के लाभ से जोड़ने से स्थानीय युवा देश के समावेशी विकास में अहम भूमिका निभा सकेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि आंध्र प्रदेश केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय पर कई विशेष ज़िम्मेदारियां हैं और उम्मीद है कि यह आदिवासी समाज में आत्मविश्वास, नेतृत्व और नीति-निर्माण की क्षमताएं विकसित करने का केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य से स्थापित संस्थानों का यह कर्तव्य है कि वे अपने क्षेत्र में आदिवासी समुदायों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और वन अधिकारों के लिए जमीनी स्तर पर काम करें।

राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि विश्वविद्यालय आने वाले सालों में हाशिए पर रहने वाले और आदिवासी समुदायों के युवाओं के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ इलाके के समग्र विकास के लिए सार्थक प्रयास करेगा।

उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों, खासकर जनजातीय विश्वविद्यालयों में ऐसी नयी प्रणाली होनी चाहिए जिनसे आदिवासी लोगों की आजीविका बेहतर हो सके। इसके लिए उन्हें वन उत्पादों, हस्तशिल्प, मोटे अनाज (मिलेट्स), औषधीय पौधों, पर्यावरण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में उत्पादक काम करने में मदद मिलनी चाहिए।

राष्ट्रपति मुर्मू ने दीक्षांत समारोह को प्रत्येक छात्र के जीवन में एक ‘महत्वपूर्ण मील का पत्थर’ करार देते हुए इसे उत्सव का दिन और एक ऐसा क्षण बताया जो छात्रों को अपने भविष्य के संकल्प लेने के लिए प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा कि देश के आदिवासी युवाओं को सरकारी प्रयासों की मदद से सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक स्थितियों में बदलाव लाने और विकास करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि स्नातक की उपाधि हासिल करने वाले छात्रों को इस प्रकार देश की तरक्की में योगदान देना होगा जहां विकास समावेशी हो और कोई भी पीछे न छूटे।

उन्होंने कहा, ‘‘आज सरकार आदिवासी और जनजाति समुदायों से जुड़े लोगों को आगे लाने की कोशिश कर रही है। लेकिन हमारी क्या जिम्मेदारी है? सरकार से इतनी मदद मिलने के क्या परिणाम होंगे ? इसीलिए, आज से ही हमें मानसिक रूप से तैयार होना होगा। केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए; समाज, शिक्षा, संस्कृति, परंपरा और अर्थव्यवस्था को बदलने और समाज को आगे ले जाने के लिए।’’

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘‘हमें सरकार की कोशिशों को हकीकत में बदलना होगा।’’

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और आंध्र प्रदेश के मानव संसाधान विकास मंत्री नारा लोकेश ने भी इस कार्यक्रम को संबोधित किया।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


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