जम्मू, 14 अप्रैल (भाषा) जम्मू में मंगलवार से मचैल माता यात्रा शुरू हो गयी और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने किश्तवाड़ जिले की सुरम्य पद्दर घाटी में स्थित 9,705 फुट ऊंचाई पर मंदिर में दर्शन किए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सर्दियों के बाद मंदिर के द्वार फिर से खुलने के साथ ही इस पवित्र तीर्थस्थल की यात्रा शुरू हो गई है। अधिकारियों ने नियमों को सख्त कर दिया है और दर्शन से पहले श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।
पिछले साल 14 अगस्त को चिसोटी गांव (मचैल माता मंदिर का प्रवेश द्वार) में बादल फटने से 63 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें ज्यादातर श्रद्धालु थे। कई लोग घायल हुए थे और लगभग 30 लोग लापता हो गए थे।
बाढ़ में एक पुल बह गया था और कई अन्य संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गई थीं जिससे संपर्क बुरी तरह से बाधित हो गया और क्षेत्र का बुनियादी ढांचा पूरी तरह से बर्बाद हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि जम्मू संभागीय आयुक्त (डीसी) रमेश कुमार, जम्मू पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) भीम सेन तुती, किश्तवाड़ उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नरेश सिंह बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के साथ मंदिर में प्रार्थना करने पहुंचे।
उन्होंने बताया कि इस धार्मिक आयोजन के उपलक्ष्य में मचैल माता की प्रतिमा को स्थानीय पुजारी पहलवान सिंह के घर से मुख्य मंदिर में स्थानांतरित किया गया।
दर्शन करने के बाद, डीसी और आईजीपी ने मचैल माता यात्रा के सुचारू और सुरक्षित संचालन के लिए किए गए प्रबंधों की व्यापक समीक्षा की।
अधिकारियों ने बताया कि समीक्षा में सुरक्षा प्रोटोकॉल, बिजली, जल आपूर्ति, स्वच्छता, लंगर सेवा, आवास, परिवहन और श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का आकलन शामिल था।
डीसी ने आरएफआईडी पंजीकरण के प्रभावी कार्यान्वयन और प्रवर्तन के लिए निर्देश जारी किए, जिसके तहत गौरी शंकर मंदिर सरकूट और बेस कैंप गुलाबगढ़ में मौके पर पंजीकरण के लिए शिविर स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजीकरण के बिना किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने स्वच्छता उपायों के कड़ाई से कार्यान्वयन के निर्देश दिए।
इसके अलावा, मचैल और आसपास के क्षेत्रों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए।
डीसी ने गुलाबगढ़ से मचैल तक यात्रा मार्ग पर प्रतिकूल मौसम और आपात स्थिति में पर्याप्त जल आपूर्ति और शिक्षण संस्थानों (स्कूलों और कॉलेजों) में आवास सुविधाओं के प्रावधान के भी निर्देश दिए।
अधिकारियों ने कहा कि अनुमति प्राप्त करने के बाद हेलीकॉप्टर सेवाएं भी शुरू की जाएंगी।
डीसी ने कहा, ‘चिसोटी में बादल फटने से प्रभावित स्थल पर तीर्थयात्रियों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।’
उन्होंने संबंधित कार्यकारी एजेंसियों को चिसोटी में पुल की ऊंचाई बढ़ाने की व्यवहार्यता का आकलन करने और आवश्यक उपाय करने का भी निर्देश दिया।
भाषा राखी नरेश
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