‘सुदर्शन चक्र’ निर्माण में डीआरडीओ अहम भूमिका निभाएगा : राजनाथ सिंह

‘सुदर्शन चक्र’ निर्माण में डीआरडीओ अहम भूमिका निभाएगा : राजनाथ सिंह

  •  
  • Publish Date - January 1, 2026 / 08:10 PM IST,
    Updated On - January 1, 2026 / 08:10 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई और यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति संगठन की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

रक्षामंत्री ने डीआरडीओ की 68वीं वर्षगांठ के अवसर पर संगठन के मुख्यालय का दौरा किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि संगठन सुदर्शन चक्र के निर्माण में ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ निभाएगा, और विश्वास व्यक्त किया कि यह ‘इस लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त करने के लिए पूरी लगन से काम करेगा’।

मिशन सुदर्शन चक्र की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2025 में लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में की थी।

सिंह ने एक बैठक के दौरान कहा, ‘‘इस पहल के तहत, डीआरडीओ को अगले दशक में पूर्ण हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमारी महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों को वायु रक्षा प्रणाली से लैस करने का दायित्व सौंपा गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने आधुनिक युद्ध में वायु रक्षा के महत्व को देखा। मुझे विश्वास है कि डीआरडीओ इस लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल करने के लिए पूरी लगन से काम करेगा।’’

डीआरडीओ की स्थापना 1958 में भारतीय सेना के तत्कालीन तकनीकी विकास प्रतिष्ठानों (टीडीई) और तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय (डीटीडीपी) के रक्षा विज्ञान संगठन (डीएसओ) के साथ विलय कर की गई थी।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक डीआरडीओ की जब स्थापना की गई थी तब यह एक छोटा संगठन था जिसमें 10 प्रतिष्ठान या प्रयोगशालाएं थीं। हालांकि, वर्षों से इसने विषय-क्षेत्रों की विविधता, प्रयोगशालाओं की संख्या, उपलब्धियों और प्रतिष्ठा के मामले में बहुआयामी विकास किया है।

सिंह ने डीआरडीओ से ‘‘तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ तालमेल बिठाते हुए’’ आगे बढ़ते रहने और बदलते समय के अनुरूप प्रासंगिक उत्पाद बनाते रहने का आह्वान किया।

उन्होंने संगठन से नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखने तथा ऐसे और क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया जो निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ा सकते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा,‘‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों ने निर्णायक भूमिका निभाई, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति संगठन की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।’’

भारत ने 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 26 लोगों की हत्या के जवाब में छह मई की देर रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान एवं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके)स्थित आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया, जिसमें कम से कम 100 आतंकवादियों को मारे गए थे।

सिंह ने भारत की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक तकनीकों और उपकरणों से लैस करने के लिए डीआरडीओ की सराहना करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसके उपकरण ‘‘बिना किसी रुकावट के काम करते रहे’’, जिससे सैनिकों का मनोबल बढ़ा।

उन्होंने प्रौद्योगिकी निर्माता होने के साथ-साथ विश्वास निर्माता बनने के लिए डीआरडीओ की प्रशंसा करते हुए कहा कि लोग आशा, निश्चितता और विश्वास के साथ इसकी ओर देखते हैं।

सिंह ने डीआरडीओ के निजी क्षेत्र के साथ सहयोग को स्वीकार करते हुए कहा कि उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्ट-अप्स के साथ बढ़ते जुड़ाव के परिणामस्वरूप एक सुदृढ़ रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘डीआरडीओ ने अपनी प्रणालियों, प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली में लगातार सुधार किया है। खरीद से लेकर परियोजना प्रबंधन तक, उद्योग के साथ जुड़ाव से लेकर स्टार्टअप और एमएसएमई के साथ सहयोग तक, काम को आसान, तेज और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए स्पष्ट प्रयास किए जा रहे हैं।’’

रक्षामंत्री ने रेखांकित किया कि वर्तमान युग केवल विज्ञान का नहीं, बल्कि निरंतर विकास और सतत सीखने का युग है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी स्कैनिंग, क्षमता मूल्यांकन और भविष्य की तैयारी ‘‘इस बदलती दुनिया में केवल शब्द नहीं रह गए हैं’’।

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया हर दिन बदल रही है। प्रौद्योगिकी, नवाचार और युद्ध के नए क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे कल का ज्ञान अप्रभावी हो रहा है। हमें कभी यह नहीं मानना ​​चाहिए कि सीखने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। हमें सीखते रहना चाहिए और खुद को चुनौती देते रहना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त हो सके।’’

डीआरडीओ मुख्यालय में हुई बैठक के दौरान सिंह को रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष, समीर वी कामत ने चल रही अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों, 2025 में संगठन की उपलब्धियों, उद्योग, स्टार्ट-अप और शिक्षा जगत को बढ़ावा देने की विभिन्न पहलों और 2026 की कार्ययोजना की जानकारी दी।

रक्षामंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘डीआरडीओ दिवस पर, मैं संगठन के सभी वैज्ञानिकों, कर्मियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। उनकी अटूट प्रतिबद्धता, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय कर्तव्य की भावना भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘स्वदेशी, भविष्य के लिए तैयार प्रौद्योगिकियों का विकास करके, डीआरडीओ हमारी रणनीतिक स्वायत्तता और हमारे सशस्त्र बलों के विश्वास को मजबूत कर रहा है। मैं डीआरडीओ परिवार के सभी सदस्यों को सार्थक उपलब्धियों से भरे वर्ष और राष्ट्र की निरंतर सेवा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’’

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, डीआरडीओ के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद उपस्थित थे।

भाषा धीरज नरेश

नरेश