चंडीगढ़, पांच सितंबर (भाषा) पंजाब के संगरूर में एक सिख युवक को कथित तौर पर हिरासत में प्रताड़ित किए जाने को लेकर विपक्ष की बढ़ती आलोचना के बीच पुलिस ने शनिवार को एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) का तबादला कर दिया और एक निरीक्षक समेत तीन अन्य अधिकारियों को पुलिस लाइन भेज दिया।
यह कार्रवाई शेरों गांव निवासी पीड़ित मोहनजीत सिंह के उस आरोप के बाद की गई, जिसमें उन्होंने कहा कि दो सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम स्थल के पास एक मकान की छत से काला झंडा लहराने के बाद हिरासत में लिए जाने पर सुनाम डिवीजन की पुलिस ने उन्हें प्रताड़ित किया।
उन्होंने दावा किया कि वह आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा नशे की समस्या पर अंकुश लगाने में कथित विफलता के खिलाफ नारे लगा रहे थे।
सिंह ने दावा किया कि पुलिस हिरासत में उन्हें बिजली का झटका दिया गया, उनकी दाढ़ी खींची गई, उनके घावों पर नमक रगड़ा गया और उनके अंतःवस्त्र फाड़ दिए गए।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, हरविंदर सिंह को तत्काल प्रभाव से प्रशासनिक आधार पर पटियाला में फर्स्ट कमांडो बटालियन, बहादुरगढ़ में डीएसपी के पद पर तैनात किया गया है।
वहीं, सुनाम थाने के थाना प्रभारी निरीक्षक प्रतीक जिंदल, चीमा थाने के थाना प्रभारी उपनिरीक्षक बलजीत सिंह और सहायक उपनिरीक्षक हरप्रीत सिंह को संगरूर पुलिस लाइन भेज दिया गया है।
शुक्रवार को कई विपक्षी दलों के नेताओं ने सिंह से स्थानीय अस्पताल में मुलाकात की, जहां कथित प्रताड़ना के बाद उनका इलाज हो रहा है।
कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भगवंत मान पर जमकर निशाना साधा और उनकी तुलना आक्रमणकारी तथा अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली से की।
वडिंग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर युवक को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने की घटना की जांच करने का आग्रह भी किया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई के प्रमुख केवल सिंह ढिल्लों ने भी वीडियो कॉल के जरिए सिंह से बात की और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की।
भाषा तान्या दिलीप
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