डूसू चुनाव: 39.77 प्रतिशत मतदान; प्रमुख पदों के लिए एबीवीपी और एनएसयूआई में मुकाबला
डूसू चुनाव: 39.77 प्रतिशत मतदान; प्रमुख पदों के लिए एबीवीपी और एनएसयूआई में मुकाबला
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में शुक्रवार रात आठ बजे तक 39.77 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। यह चुनाव ऐसे समय हुआ है जब कुछ महीने पहले जंतर-मंतर पर युवाओं से जुड़े प्रदर्शन में जवाबदेही और छात्रों के मुद्दों से जुड़े सवाल प्रमुखता से उभरे।
विश्वविद्यालय की ओर से अंतिम मतदान प्रतिशत के आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। पिछले वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकतर कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों में 39.45 प्रतिशत मतदान हुआ था।
मतों की गिनती शनिवार सुबह आठ बजे शुरू होगी। प्रतिष्ठित डूसू चुनाव के परिणाम से यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच कौन सा छात्र संगठन उनके रुख और चिंताओं को बेहतर ढंग से समझ पाया है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों में जीत दर्ज की। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में एबीवीपी ने अध्यक्ष और सचिव पद के साथ दोनों काउंसलर सीट पर जीत दर्ज कर अपने विरोधियों का पूरी तरह सफाया कर दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठन ने कहा कि उसने कॉलेज चुनावों में कई स्थानों पर सूपड़ा साफ करते हुए मजबूत प्रदर्शन किया है। एबीवीपी ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रयासों के बावजूद डूसू चुनाव में 4-0 की जीत का भरोसा जताया।
पेइंग-गेस्ट (पीजी) आवास के ऊंचे किराये, किफायती आवास सुविधाओं की कमी, गैर-कार्यशील छात्रावास और आने-जाने का खर्च छात्रों के बीच प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने आए। दिल्ली के सत्य निकेतन में हाल में एक इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ी हैं।
चुनाव से जुड़े संवादों में जवाबदेही और छात्रों के मुद्दे प्रमुख रहे।
सुबह की पाली के लिए मतदान सुबह 8:30 बजे शुरू होकर अपराह्न तीन बजे समाप्त हुआ, जबकि शाम की पाली वाले कॉलेजों में मतदान शाम 7:30 बजे तक जारी रहा।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को डूसू चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकालने पर पूरी तरह रोक लगा दी और सभी छात्र संगठनों तथा उम्मीदवारों से यह बताने को कहा कि नियमों के उल्लंघन के लिए उन पर चुनावी जुर्माना क्यों न लगाया जाए।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने ये निर्देश डूसू चुनाव के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों के बार-बार और खुले तौर पर उल्लंघन पर गौर करने के बाद दिए।
भाषा
शुभम नेत्रपाल
नेत्रपाल

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