डूसू नतीजे : कॉजपा नेता ने कहा – ज्यादातर छात्र ‘मौजूदा शासन’ के खिलाफ, लेकिन बंटे हुए हैं

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डूसू नतीजे : कॉजपा नेता ने कहा - ज्यादातर छात्र ‘मौजूदा शासन’ के खिलाफ, लेकिन बंटे हुए हैं

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  • Publish Date - September 19, 2026 / 08:49 PM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 08:49 PM IST

नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने शनिवार को कहा कि डूसू चुनाव के नतीजे दिखाते हैं कि ज्यादातर छात्र ‘‘मौजूदा शासन’’ के खिलाफ हैं, लेकिन वे विभाजित हैं।

दास ने कांग्रेस द्वारा अपने छात्र संगठन को संभालने के तौर-तरीके और कुछ वामपंथी छात्र संगठनों के रुख पर भी सवाल उठाए।

कॉजपा नेता ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की विजय कोई बहुत बड़ी जीत नहीं है, बल्कि यह वोटों के बंटवारे का परिणाम है।

दास ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ज्यादातर छात्र मौजूदा शासन के खिलाफ हैं, लेकिन बंटे हुए हैं। पद हासिल करने वालों को याद रखना चाहिए कि वे राजा या रानी नहीं हैं। बहुमत ने उन्हें वोट नहीं दिया है।’’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके संगठनों को ‘‘कॉजपा के पीछे पड़ने’’ के बजाय अपना प्रदर्शन सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

दास ने कहा, ‘‘प्रदर्शन सुधारने का काम 12 साल से चल रहा है और लोग धैर्य खो रहे हैं। इसका उदाहरण एनएसयूआई का वह बागी उम्मीदवार है, जिसने टिकट नहीं मिलने के बाद उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय के तौर पर बड़ी जीत हासिल की।’’

दास ने यह भी कहा कि वाम एकता में कुछ लोग ‘‘वैचारिक शुद्धता और विशिष्टता’’ पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें जाग जाना चाहिए और वास्तविकता को समझना चाहिए।’’

दास ने कहा, ‘‘अगर विपक्ष की यह ‘एकता’ है तो मुझे डर है कि वे लगातार विपक्ष में ही बने रहेंगे।’’

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने डूसू के चुनाव में केंद्रीय पैनल के चार पद में से तीन पर जीत दर्ज की, जबकि एनएसयूआई का टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।

कांग्रेस से संबद्ध एनएसयूआई केंद्रीय पैनल के चार पद में से किसी पर भी जीत हासिल नहीं कर सका। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की।

इस बीच, डूसू चुनाव के शनिवार को घोषित नतीजों में वामपंथी छात्र संगठन आइसा-एसएफआई गठबंधन के उम्मीदवार चार केंद्रीय पैनल पदों में से कम से कम दो पदों पर नोटा (इनमें से कोई नहीं) को मिले वोटों से भी कम वोट हासिल कर पाए।

अध्यक्ष पद के लिए आइसा-एसएफआई गठबंधन की उम्मीदवार अनन्या रतूड़ी को 5,377 वोट मिले, जो नोटा के 4,310 वोटों से 1,067 अधिक थे। सचिव पद के मुकाबले में स्टैनजिन डेस्क्यॉन्ग को 8,734 वोट मिले, जबकि नोटा के लिए 7,884 वोट पड़े।

अन्य दो पदों पर स्थिति उलट रही। उपाध्यक्ष पद के लिए आइसा-एसएफआई उम्मीदवार अक्षत शिखर को 2,383 वोट मिले, जबकि नोटा को 4,359 वोट मिले, यानी वामपंथी उम्मीदवार के मुकाबले नोटा को 1,976 वोट अधिक मिले।

संयुक्त सचिव पद के चुनाव में बी पारिजात को 5,837 वोट मिले, जबकि नोटा के पक्ष में 7,389 वोट पड़े। इस तरह दोनों के बीच 1,552 वोटों का अंतर रहा।

भाषा शफीक सुरेश

सुरेश