तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर निर्वाचन आयोग चार महीने में फैसला ले: न्यायालय
तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर निर्वाचन आयोग चार महीने में फैसला ले: न्यायालय
नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी के दोनों गुटों में जारी विवाद पर चार महीने के भीतर फैसला ले।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों से निर्वाचन आयोग के समक्ष चल रही कार्यवाही में चार हफ्ते के भीतर अपनी दलीलें पूरी करने को कहा।
पीठ ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद तीन महीने के भीतर इस मुद्दे पर फैसला करे।
शीर्ष अदालत ने यह आदेश पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया जिसमें दोनों गुटों को तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से अस्थायी रूप से रोकने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है।
पीठ ने कहा, “हम प्रतिवादियों/याचिकाकर्ताओं को अपने हलफनामे/अतिरिक्त हलफनामे आदि रिकॉर्ड पर रखने के लिए चार हफ्ते का समय देते हैं। चार हफ्ते के भीतर दलीलें पूरी हो जानी चाहिए।”
उसने कहा कि इसके बाद निर्वाचन आयोग तीन महीने के भीतर इस मुद्दे पर फैसला करेगा।
उच्चतम न्यायालय ने 24 सितंबर को मामले की सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग से उस समयसीमा के बारे में बताने को कहा था, जिसके भीतर वह दोनों गुटों के बीच विवाद पर अंतिम फैसला ले सकता है।
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने सोमवार को चार ऐसे मामलों का जिक्र किया, जिनमें आयोग को चुनाव चिह्न से जुड़े मुद्दे पर फैसला लेना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समय लगता है, क्योंकि पार्टी कार्यकर्ताओं की तरफ से बड़ी संख्या में दस्तावेज और हलफनामे जमा किए जाते हैं।
पीठ ने नायडू से कहा, “तीन महीने बीते चुके हैं। आप अगले तीन महीने में इस पर फैसला लें।”
शीर्ष अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल का इस्तेमाल कर सकता है और प्रौद्योगिकी की मदद ले सकता है।
नायडू ने कहा कि समय-सीमा उस तारीख से तय की जानी चाहिए, जब पार्टियां अपनी दलीलें पूरी कर लें।
तृणमूल के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने जुलाई में ही अपना जवाब दाखिल कर दिया था, लेकिन दूसरे पक्ष ने अभी तक ऐसा नहीं किया है।
नायडू ने पीठ को बताया कि कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और निर्वाचन आयोग को वहां भी अपने संसाधन लगाने की जरूरत है।
जब पीठ ने निर्वाचन आयोग से कहा कि वह दलीलें पूरी होने के तीन महीने के भीतर इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करे, तो नायडू ने कुछ और समय देने का अनुरोध किया।
पीठ ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में निर्वाचन आयोग अदालत का रुख कर सकता है।
निर्वाचन आयोग ने 17 सितंबर को दोनों प्रतिद्वंद्वी धड़ों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे। आयोग ने विवाद पर अंतिम फैसला होने तक दोनों गुटों को तृणमूल कांग्रेस के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था।
निर्वाचन आयोग की ओर से ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था। वहीं, अरूप रॉय और ऋतब्रत जैसे नेता वाले बागी खेमे को आयोग ने ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया था।
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं। मतगणना नौ अक्टूबर को की जाएगी।
भाषा पारुल संतोष
संतोष

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