नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने छह साल पुराने एक मामले को अपनी प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) में जोड़ने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कदम पर आपत्ति जताई।
ईडी ने जिस छह साल पुराने मामले पर धन शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई शुरू की थी, वह पूरी हो चुकी है।
न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने इस कदम को अवैध और प्रक्रिया के विपरीत करार देते हुए कहा कि मामले की जानकारी होने के बावजूद ईडी ने न तो नई ईसीआईआर दर्ज की और न ही बाद में दर्ज की गई प्राथमिकी को समय रहते मौजूदा ईसीआईआर में शामिल किया।
पीठ ने कहा कि ईडी का आचरण इस दलील का समर्थन करता है कि मौजूदा ईसीआईआर को ‘‘किसी तरह बचाए रखने’’ और याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर छापेमारी, कुर्की, लेन-देन पर रोक लगाने तथा पीएमएलए के तहत मिली शक्तियों को बरकरार रखने के लिए यह कदम उठाया गया था।
अदालत ने 18 अगस्त को दिए फैसले में कहा, ‘‘इस मामले में ईडी का आचरण संतोषजनक नहीं पाया गया और इससे गंभीर चिंताएं उत्पन्न होती हैं। यह परिस्थिति अदालत के इस निष्कर्ष को और मजबूत करती है कि विवादित कदम अवैधता, प्रक्रियागत अनियमितता, अतार्किकता और अधिकारों के अनुचित इस्तेमाल से प्रभावित है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘ऐसी ईसीआईआर को स्वीकृत करना इस अदालत की राय में अधिकार क्षेत्र से बाहर, अवैध और प्रक्रियागत रूप से अनियमित है। ईडी को पहली प्राथमिकी के संबंध में स्वतंत्र रूप से ईसीआईआर दर्ज करने से कोई नहीं रोकता था, जो स्वीकार्य रूप से अब भी कायम है, बशर्ते ऐसा करने के लिए कानूनी आवश्यकताएं पूरी होती हों। ईडी ने ऐसा नहीं करने का फैसला किया, जिसके कारण वही बेहतर जानता है।’’
ईडी की दिसंबर 2021 में दर्ज की गई ईसीआईआर, आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा फरवरी 2021 में दर्ज एक प्राथमिकी पर आधारित थी।
यह प्राथमिकी पूर्व सांसद दिवंगत महेंद्र प्रसाद के परिवार के दो गुटों के बीच विवाद को लेकर दर्ज की गई थी।
मामला प्रसाद की पत्नी सतुला देवी के जाली हस्ताक्षरों के आधार पर परिवार के एक गुट द्वारा शेयरों के हस्तांतरण और बैंक लेनदेन से संबंधित था।
हालांकि, जांच पूरी करने के बाद ईओडब्ल्यू ने दिसंबर 2022 में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल की और कहा कि मामले में कोई अपराध नहीं बनता है।
भाषा जितेंद्र नरेश
नरेश