अल फलाह के अध्यक्ष के खिलाफ ईडी के आरोपपत्र पर सुनवाई 13 फरवरी को होगी

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अल फलाह के अध्यक्ष के खिलाफ ईडी के आरोपपत्र पर सुनवाई 13 फरवरी को होगी

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  • Publish Date - January 31, 2026 / 06:02 PM IST,
    Updated On - January 31, 2026 / 06:02 PM IST

नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दिकी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल किये गये आरोपपत्र पर सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तारीख तय की।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने इस मामले की सुनवाई तब स्थगित कर दी जब बचाव पक्ष के वकीलों ने यह कहते हुए आरोपपत्र और संबंधित दस्तावेजों पर गौर करने के लिए अधिक समय मांगा कि ये दस्तावेज 10,000 पृष्ठों के हैं।

वकीलों ने कहा कि वे सिद्दिकी से मिल नहीं सके क्योंकि अपराध शाखा ने उन्हें एक अन्य मामले में हिरासत में ले लिया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की 140 करोड़ रुपये की जमीन और इमारतों को 16 जनवरी को कुर्क कर लिया था।

लाल किला के पास 10 नवंबर को बम विस्फोट के बाद यह विश्वविद्यालय सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आया था।

ईडी ने अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दिकी और उनके चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया है।

धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत अंतरिम आदेश जारी होने पर फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित इस विश्वविद्यालय की 54 एकड़ भूमि और उसकी इमारतों को कुर्क कर लिया गया था जिनमें विभिन्न स्कूलों और विभागों के भवन, छात्रावास आदि शामिल हैं।

ईडी ने सिद्दिकी को उनके अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के साथ धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन के आरोपों में नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया था।

अल फलाह समूह के खिलाफ ईडी की जांच दिल्ली पुलिस अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई दो प्राथमिकियों पर आधारित है। आरोप है कि अल फलाह विश्वविद्यालय ने गैरकानूनी लाभ की खातिर विद्यार्थियों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों को गुमराह करने के लिए एनएएसी मान्यता और यूजीसी मान्यता के बारे में झूठे और भ्रामक दावे किए।

इससे पहले ईडी ने कहा था कि विश्वविद्यालय ने 2018 एवं 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था। उसने कहा था कि आय में ‘यह तीव्र वृद्धि’ समूह के घोषित वित्तीय आंकड़ों या उसकी संपत्ति के विस्तार से मेल नहीं खाता है।

एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की जांच के दौरान विश्वविद्यालय की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई। इस मामले में विश्वविद्यालय से जुड़े दो चिकित्सकों मुजम्मिल अहमद गनई और शाहीन सईद को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

भाषा

राजकुमार संतोष

संतोष