शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, प्रधानमंत्री का अहंकार तोड़ देगा ‘जेन जेड’: कांग्रेस
शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, प्रधानमंत्री का अहंकार तोड़ देगा ‘जेन जेड’: कांग्रेस
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) कांग्रेस ने सीबीएसई की 12वीं कक्षा की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली से जुड़ी ‘‘अनियमितताओं’’ को लेकर सोमवार को सरकार पर निशाना साधा और कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में व्यापक सुधार होना चाहिए।
पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार सवाल पूछने वाले युवाओं को डराती और बदनाम करती है, लेकिन ये युवा और ‘जेन जेड’ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अहंकार तोड़ेंगे।
कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ मूल्यांकन की एक डिजिटल प्रणाली है। इसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल स्वरूप में कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचा जाता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया। दशकों में पहली बार सीबीएसई बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं। 18.5 लाख बच्चों ने परीक्षा दी और एक हफ़्ते से ओएसएम ग़लत मार्किंग और जांच की गड़बड़ी की शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं और शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘17 साल का एक बच्चा, जिसकी कॉपी ग़लत जांची गई, न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया पर आया। मगर, उसे मदद नहीं, गालियां मिलीं, भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ ने उसे ‘राष्ट्र विरोधी’ कहा, सोरोस का एजेंट कहा, ‘डीप स्टेट’ का हिस्सा कहा। जब 17 साल का बच्चा अपने भविष्य के लिए आवाज़ उठाता है, तो भाजपा उसे देशद्रोही बना देती है।’’
राहुल गांधी ने दावा किया कि सच यह है कि मोदी सरकार युवाओं और ‘जेन जेड’ से डरती है, क्योंकि वो अब सवाल पूछ रहे हैं और सवाल पूछने वाले को यह सरकार बदनाम करती है, डराती है, कुचलती है।
उन्होंने कहा, ‘‘सुन लीजिए, मोदी जी, यही युवा, यही जेन जी आपका अहंकार तोड़ेगा।’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘योगी आदित्यनाथ शासित उत्तर प्रदेश में लगातार हुए पेपर लीक और ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान इस मुद्दे को लगातार उठाए जाने के बाद, मोदी सरकार ने फरवरी, 2024 में सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम को संसद से पारित कराया। जहां मोदी सरकार ने इसे ऐतिहासिक कानून बताया, वहीं विपक्षी सांसदों ने उसी समय कहा था कि यह कानून “गेस पेपर” या अन्य तरीकों से होने वाले पेपर लीक को रोकने के लिए कुछ भी नहीं करता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आज यह स्पष्ट हो गया है कि मोदी सरकार का जल्दबाजी में लाया गया यह कानून पेपर लीक रोकने के लिए बेहद अपर्याप्त था। भले ही मोदी सरकार कथित तौर पर शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सामने नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक से इनकार कर रही हो, लेकिन यह साफ है कि एक ‘गेस पेपर’ सबसे ऊंची बोली लगाने वालों तक पहुंचाया गया था।’’
रमेश के अनुसार, पिछले दो वर्षों में लाखों छात्र इसकी कीमत चुका चुके हैं, क्योंकि मोदी सरकार ने विपक्ष की आवाज सुनने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा मंत्री प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए, एनटीए में व्यापक सुधार होना चाहिए और मोदी सरकार को सार्वजनिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने, टाइप करने, अनुवाद करने, छापने, पहुंचाने, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एक फुलप्रूफ प्रोटोकॉल विकसित करनी चाहिए।’’
उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधान मंत्री छात्र कल्याण और हमारी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाएंगे?
रमेश ने कहा, ‘‘यथास्थिति को जारी रखना केवल भारत के छात्रों के प्रति प्रधानमंत्री की उदासीनता को साबित करेगा।’’
भाषा हक हक नरेश
नरेश

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