उखरुल हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के प्रयास जारी : मणिपुर के उपमुख्यमंत्री
उखरुल हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के प्रयास जारी : मणिपुर के उपमुख्यमंत्री
इंफाल, 10 फरवरी (भाषा) मणिपुर के उपमुख्यमंत्री एल दिखो ने मंगलवार को कहा कि उखरुल जिले के लिटान में कुकी-जो और नगा समुदायों के बीच हुई हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि सभी हितधारक हिंसा का समाधान निकालने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
दिखो ने इंफाल में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘मुख्यमंत्री, सरकार, सुरक्षा बल, नागरिक समाज समूह और अन्य हितधारक समाधान निकालने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। हम सभी से मिलने और उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं। सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा स्थिति को देखते हुए हम शायद तुरंत सबकुछ हल नहीं कर पाएंगे, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही हालात सुधरेंगे।’’
मणिपुर में मई 2023 में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसके बाद राज्य में पिछले साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।
कुकी-जो समुदाय के नेताओं की समुदाय के लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई की मांग के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने चार फरवरी को मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने यह पदभार भाजपा नेता एन बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लगभग एक साल बाद संभाला।
कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के विधायक एल दिखो ने मणिपुर के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
दिखो ने कहा कि अधिकारी अभी तक उखरुल हिंसा के पीछे के लोगों की पहचान नहीं कर पाए हैं, लेकिन ऐसा करने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा, “पहले घरों पर अचानक गोलीबारी और आगजनी के बाद कुछ भ्रम की स्थिति थी। अब स्थिति काफी स्पष्ट है।”
दिखो ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है और स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है।
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि सभी सहयोग करेंगे।”
इस बीच, राज्य सरकार ने कांगपोकपी जिले के लुंगटिन उपमंडल और कामजोंग जिले के फुंग्यार उपमंडल में इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को तत्काल प्रभाव से पांच दिनों के लिए बढ़ा दिया है।
गृह विभाग ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय इस आशंका के मद्देनजर लिया गया है कि असामाजिक तत्व सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके ऐसी तस्वीरें, पोस्ट और वीडियो प्रसारित कर सकते हैं, जो जनता की भावनाओं को भड़का सकते हैं और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।
भाषा पारुल नेत्रपाल
नेत्रपाल

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