बकरीद : बकरों और चांदी की कीमत में भारी उछाल ने बदला कुर्बानी का गणित

बकरीद : बकरों और चांदी की कीमत में भारी उछाल ने बदला कुर्बानी का गणित

बकरीद : बकरों और चांदी की कीमत में भारी उछाल ने बदला कुर्बानी का गणित
Modified Date: May 25, 2026 / 06:19 pm IST
Published Date: May 25, 2026 6:19 pm IST

(अहमद नोमान)

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत में बढ़ती महंगाई के असर से बकरीद का त्योहार भी अछूता नहीं है। देश में बकरीद के मौके पर कुर्बान किए जाने वाले औसत बकरों की कीमत में पिछले साल की तुलना में कम से कम 15 हजार रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पशु व्यापारियों का कहना है कि बकरों की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें मटन और चारे की कीमतों में वृद्धि प्रमुख है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में गाय और भैंस की कुर्बानी को लेकर सख्त नियम लागू किए जाने के बाद बड़ी संख्या में बकरा व्यापारियों का वहां जाना भी कीमतों में वृद्धि की एक बड़ी वजह है, क्योंकि इससे अन्य बाजारों में बकरों की उपलब्धता कम हो गई है।

दूसरी ओर, चांदी महंगी होने से ईद उल अजहा पर कुर्बानी कराने के लिए पात्र लोगों की संख्या में भी कमी आई है। इस्लामी विद्वानों के मुताबिक, बकरीद पर कोई व्यक्ति कुर्बानी के लिए पात्र है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पास 612 ग्राम चांदी या उसके बराबर रकम या कोई पूंजी है या नहीं।

ईद उल अजहा या बकरीद का त्योहार 28 मई को मनाया जाएगा। इस्लामी मान्यता के अनुसार, पैगंबर हजरत इब्राहिम अपने बेटे हजरत इस्माइल को इसी दिन अल्लाह के हुक्म पर खुदा की राह में कुर्बान करने जा रहे थे, तभी अल्लाह ने उन्हें (हजरत इस्माइल) जीवनदान दे दिया था। इसी की याद में यह त्योहार मनाया जाता है।

फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि जिन लोगों के पास 612 ग्राम चांदी या उसके बराबर रकम या कोई और पूंजी हो, उनके लिए बकरीद पर कुर्बानी कराना जरूरी होता है।

उन्होंने बताया कि यह शर्त परिवार के पुरुषों और महिलाओं दोनों पर समान रूप से लागू होती है।

हालांकि, बीते एक बरस में चांदी की कीमत में जबर्दस्त वृद्धि हुई है और दिल्ली में चांदी के दाम 2.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं।

पुरानी दिल्ली के मीना बाजार में लगी पशु मंडी में बकरा खरीदने आए गुलफाम ने बताया कि पांच सदस्यों वाले उसके परिवार में इस साल सिर्फ दो लोग कुर्बानी देने के पात्र हैं, जबकि पिछले साल तक घर के सभी लोग इसके लिए पात्र थे।

गुलफाम के मुताबिक, पिछले साल चांदी की जो कीमत थी, उसके हिसाब से अगर किसी व्यक्ति के पास लगभग 60 से 65 हजार रुपये की बचत होती थी, तो उसके लिए कुर्बानी करना अनिवार्य माना जाता था, लेकिन इस वर्ष चांदी की कीमत बढ़ने के कारण यह सीमा भी बढ़ गई है और अब लगभग पौने दो लाख रुपये की बचत होने पर ही व्यक्ति कुर्बानी के लिए पात्र माना जाएगा।

पुरानी दिल्ली में मोटर का काम करने वाले गुलफाम ने कहा कि उसका बजट 15-20 हजार रुपये है, लेकिन बकरों की कीमत बहुत बढ़ गई है और 30-35 हजार रुपये से कम दाम में कोई बकरा ही नहीं मिल रहा है।

वहीं, जाफराबाद की मंडी में आए किताब विक्रेता सलमान ने बताया कि इस बार मंडी में औसत बकरों की कीमत पिछले साल की तुलना में करीब 15 हजार रुपये ज्यादा है। उसने बताया कि 14-16 किलोग्राम का बकरा पिछले साल 15-16 हजार रुपये में आ जाता था, लेकिन इस बार यह 30-35 हजार रुपये में मिल रहा है।

बरेली के रहने वाले बकरा व्यापारी फिदा हुसैन ऊंची कीमतों के बारे में कहते हैं कि बहुत से बकरा व्यापारी पश्चिम बंगाल चले गए हैं, जहां नवनिर्वाचित सरकार ने गाय और भैंस की कुर्बानी को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं, जिससे वहां बकरों की मांग बढ़ गई है। हुसैन के अनुसार, यही कारण है कि न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे उत्तर भारत में बकरों की कीमतें बढ़ गई हैं।

संभल के रहने वाले पशु व्यापारी रेहान ने कहा कि चारा और मटन की कीमतों में वृद्धि के कारण भी बकरे महंगे हो गए हैं।

भाषा नोमान नोमान पारुल

पारुल


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