सहायता और गैर सहायता प्राप्त संस्थानों के कर्मी जनगणना के लिए बाध्य नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
सहायता और गैर सहायता प्राप्त संस्थानों के कर्मी जनगणना के लिए बाध्य नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
प्रयागराज, 25 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकारी सहायता प्राप्त और गैर सरकारी सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारी, जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत किसी कार्य के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।
अदालत ने गौतमबुद्ध नगर के जिला विद्यालय निरीक्षक के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसके तहत जनगणना उद्देश्य के लिए सभी सरकारी सहायता प्राप्त और गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के सभी अध्यापकों और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की सूची मांगी गई थी।
अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने कहा, ‘‘ यह अदालत प्रथम दृष्टया पाती है कि सरकारी सहायता प्राप्त या गैर सरकारी सहायता प्राप्त निजी संस्थानों के अध्यापक और अन्य कर्मचारी, स्थानीय अधिकारियों जैसे बीएसए, जिला विद्यालय निरीक्षक और डीपीआरओ के अधीन नहीं आते। इन अधिकारियों को ही जनगणना के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने होते हैं।’’
अदालत ने कहा, ‘‘ सरकारी सहायता प्राप्त या गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत किसी भी कार्य के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।’’
अदालत ‘इंडिपेंडेंट सेल्फ फाइनेंस्ड स्कूल्स एसोसिएशन’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश को चुनौती दी गई थी। जिला विद्यालय निरीक्षक ने जनगणना के कार्य के लिए सभी सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त संस्थानों के प्रधानाचार्य/प्रबंधन को सभी अध्यापकों और अन्य कर्मियों की सूची उपलब्ध कराने को कहा था।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, इन शिक्षण संस्थानों के कर्मचारी जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4ए के तहत स्थानीय प्राधिकरण के अंतर्गत नहीं आते। यह धारा व्यवस्था देती है कि प्रत्येक स्थानीय अधिकारी को जनगणना कार्य के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
अदालत ने यह आदेश 21 मई को पारित किया जिसे सोमवार को अपलोड किया गया।
भाषा सं राजेंद्र शोभना
शोभना

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